मुंबई , अप्रैल 29 -- बॉम्बे उच्च न्यायालय ने 26/11 मुंबई आतंकी हमले के बरी आरोपी फहीम अंसारी की अपनी आजीविका के लिए ऑटो-रिक्शा चलाने हेतु जरुरी पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट (पीसीसी) की मांग को लेकर याचिका बुधवार को खारिज कर दी।
न्यायमूर्ति ए.एस. गडकरी और न्यायमूर्ति रणजीतसिंह भोंसले की पीठ ने अपने आदेश में अभियोजन पक्ष की दलीलों से सहमति जताई और अधिकारियों के सर्टिफिकेट देने से इनकार करने के फैसले को सही ठहराया।
पीठ ने हालांकि कहा कि विस्तृत आदेश बाद में जारी किया जाएगा।
अंसारी ने पिछले साल जनवरी में मुंबई पुलिस को निर्देश देने के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, ताकि उसे सर्टिफिकेट जारी किया जा सके। उसने यह कदम तब उठाया जब रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस का बैज और परमिट पाने के लिए जरुरी पीसीसी के लिए उसका आवेदन खारिज कर दिया गया था। सुनवाई के दौरान उसने अदालत को बताया कि इस संबंध में उसने एक आरटीआई दायर कर इनकार किए जाने का कारण पूछा था। इसके जवाब में उसे बताया गया कि इनकार का आधार वे आरोप थे जो उसे प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जोड़ते थे।
अपनी याचिका में अंसारी ने इस फैसले को "मनमाना, गैर-कानूनी और भेदभावपूर्ण" बताया। उसने दलील दी कि यह फैसला उसकी आजीविका के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करता है। याचिका का विरोध करते हुए राज्य सरकार ने तर्क दिया कि अंसारी अभी भी निगरानी में है, जिसके चलते उसके आवेदन को खारिज करना ज़रूरी था। यह भी बताया गया कि अंसारी को 2008 के रामपुर सीआरपीएफ कैंप ग्रेनेड हमले में दोषी ठहराया गया था और 10 साल की सजा सुनाई गई थी। इस हमले में सात जवान और एक आम नागरिक मारे गए थे। उसे हालांकि 26/11 मामले में बरी कर दिया गया था, लेकिन निचली अदालत ने लश्कर-ए-तैयबा के साथ उसके कथित जुड़ाव का जिक्र किया था।
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