मुंबई , मई 13 -- फेलाइन क्लब ऑफ इंडिया (एफसीआई) ने नवी मुंबई में रविवार 17 मई को एक विशाल कैट शो आयोजित करने की घोषणा की है जिसमें 600 से अधिक बिल्लियों को दर्शकों को दिखाया जाएगा।
आयोजकों ने दावा किया है कि नवी मुंबई के वाशी स्थित सिडको एग्ज़ीबिशन सेंटर में होने वाला यह कार्यक्रम विश्व में इस तरह के सबसे बड़े कार्यक्रमों में एक है।
एफसीआई ने कहा है कि बिल्लियों की इस प्रदर्शनी में अंतरराष्ट्रीय जज, एडॉप्शन (अपनाने) की पहल, बिल्लियों के रखरखाव के प्रति शैक्षणिक गतिविधियां और पेट इंडस्ट्री (पालतू जानवरों की औषधि, चार और अन्य समान बनाने वाले उद्योग ) के प्रमुख ब्रांड्स की भागीदारी होगी। कार्यक्रम में संगठन की ओर से बिल्लियों के कल्याण और रखरखाव की पहलों की जानकारी दी जाएगी।
एफसीआई के अध्यक्ष साक़िब पठान ने यहां एक मीडिया कांफ्रेंस में बताया कि मुंबई में संगठन द्वारा द्वारा आयोजित किया जा रहा यह छठा कैट शो महानगर ही नहीं, पूरी दुनिया में इस तरह के अब तक सबसे बड़े आयोजनों में होगा । इस चैंपियनशिप इवेंट में ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, मलेशिया और थाईलैंड से जज शामिल होंगे, जो विभिन्न मान्यता प्राप्त नस्लों की बिल्लियों का मूल्यांकन करेंगे।
प्रदर्शनी में पर्शियन, बंगाल, एक्सोटिक शॉर्ट हेयर, मेन कून और अन्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त नस्लों की बिल्लियां शामिल होंगी।
श्री पठान ने बताया कि संगठन ने भारतीय आवारा बिल्लियों को 'इंडीमाऊ' नाम से पंजीकृत कर उन्हें मान्यता देने के लिए विशेष प्रयास किए हैं। इससे भारतीय मूल की बिल्लियों की संगठित कैट शो में भागीदारी बढ़ेगी और स्वदेशी नस्लों को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान मिलेगी।
प्रदर्शनी सुबह 11 बजे से शाम 7 बजे तक खुली रहेगी। आयोजकों ने बताया कि कार्यक्रम में बच्चों के लिए फन ज़ोन, बिल्लियों की देखभाल पर शैक्षणिक सत्र, पालतू पशु मालिकों के लिए जागरूकता गतिविधियां और आगंतुकों को ब्रीडर्स, पशु चिकित्सकों तथा कैट विशेषज्ञों से सीधे संवाद का अवसर मिलेगा। पशु कल्याण और कैट रेस्क्यू से जुड़ी एनजीओ भी कार्यक्रम में भाग लेंगी, जिसके माध्यम से लोग कार्यक्रम के दौरान बिल्लियों को गोद भी ले सकेंगे।
एफसीआई के देश के प्रमुख शहरों में क्षेत्रीय क्लबों के माध्यम से काम करता है। संगठन बेंगलुरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान के साथ मिलकर जेनेटिक फिंगरप्रिंटिंग सिस्टम और सर्टिफिकेशन प्रक्रियाएं शुरू करने पर भी काम कर रहा है। इससे वंशावली पहचान और पूर्वजों की ट्रैकिंग प्रणाली को अधिक मजबूत बनाया जा सकेगा।
संगठन ने कहा कि कैट रजिस्ट्रेशन और ब्रीड सर्टिफिकेशन कार्यक्रमों से भारत में दस्तावेज़ित वंश प्रणाली स्थापित करने और नस्ल मानकों को बनाए रखने में मदद मिल रही है। एफसीआई बिल्लियों में माइक्रोचिपिंग को बढ़ावा देने पर भी जोर देता है, ताकि इनब्रीडिंग (निकट संबंधियों के साथ संयोग से प्रजनन) को रोका जा सके और जीन पूल में सुधार हो। इनब्रीडिंग से बिल्लियों में शारीरिक विकृतियां उत्पन्न हो सकती हैं, जबकि वंशावली ट्रैकिंग स्वस्थ नस्ल मानकों को बनाए रखने में सहायक होती है।
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