मुंबई , जून 20 -- महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई की सरकारी बस सेवा 'बेस्ट' की हड़ताल शनिवार को दूसरे दिन भी जारी रही, जिससे यात्री सड़कों पर फंसे रहे और उन्हें रेलवे स्टेशनों, मेट्रो स्टेशनों तथा अपने कार्यस्थलों तक पहुँचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ी।

ये बस कर्मचारी वेतन, पेंशन और बसों की संख्या बढ़ाने जैसी अपनी पुरानी मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं। बस सेवाएं लगभग पूरी तरह ठप होने के कारण दफ्तर जाने वालों, छात्रों, बुजुर्गों और मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

सरकार के हस्तक्षेप और आवश्यक सेवा रखरखाव कानून लागू किए जाने के बावजूद बेस्ट कर्मचारियों ने अपनी हड़ताल जारी रखी है। उनका कहना है कि किसी ठोस फैसले के अभाव में उन्होंने अपना आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया है।

कर्मचारी यूनियनों की संयुक्त कार्रवाई समिति के संयोजक उदय आंबोनकर ने कहा कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा, "मुंबई नगर निगम का 500 करोड़ रुपये का आवंटन स्वागत योग्य है लेकिन यह नाकाफी है। हमें बकाया राशि का समय पर भुगतान और अस्थायी कर्मचारियों को स्थायी करने की आवश्यकता है।" प्रबंधन को दी गयी अंतिम समय सीमा गुरुवार आधी रात को समाप्त होने के बाद बेस्ट संयुक्त कामगार समिति और 12 कर्मचारी यूनियनों ने इस हड़ताल का आह्वान किया गया था।

बस संचालन और रखरखाव से जुड़े कर्मचारी इस आंदोलन में शामिल हो गये हैं। इससे बेस्ट की 4,200 बसों के बेड़े पर रोजाना निर्भर रहने वाले लगभग 40 लाख यात्री प्रभावित हो रहे हैं। समिति की मुख्य मांग बेस्ट के बजट का मुंबई नगर निगम के बजट में विलय करना है।

अन्य मांगों में अनुबंध पर काम करने वाले चालकों को स्थायी नौकरी देना, बेहतर वेतन एवं भत्ते और बेस्ट की खुद की 5,000 नयी बसें जोड़ना शामिल है। इसके साथ ही वे सेवानिवृत्त कर्मचारियों के कानूनी बकाए का एकमुश्त निपटारा करने और साल 2016 से 2026 की अवधि के लिए सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की मांग कर रहे हैं। यह हड़ताल 17 जून से महाराष्ट्र क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय के लिपिक कर्मचारियों की जारी समानांतर हड़ताल के बीच हो रही है, जिससे वाहनों के पंजीकरण और लाइसेंस जैसी सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं।

बेस्ट की महाप्रबंधक सोनिया सेठी ने आवश्यक सेवा कानून लागू करते हुए चिकित्सा या आपातकालीन मामलों को छोड़कर 18 जून से परिवहन और बिजली कर्मचारियों की सभी छुट्टियों पर रोक लगा दी है। डिपो प्रबंधकों और विभागीय इंजीनियरों को बिना किसी बाधा के बिजली आपूर्ति और बस संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिये गये हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, औद्योगिक अदालत ने इस हड़ताल पर रोक लगा दी थी, लेकिन यूनियन नेताओं ने बजट विलय और 5,000 नयी बसों की खरीद जैसी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई न होने का हवाला देते हुए हड़ताल पर आगे बढ़ने का फैसला किया।

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