मुंगेर , जनवरी 15 -- मुंगेर शहर के लोगों ने आज 1934 के भूकंप की विभीषिका को याद किया और इस अवसर पर दरिद्र नारायण भोज का आयोजन किया गया।
वर्ष 1934 के 15 जनवरी को आये भूकंप में आज के दिन मुंगेर में सरकारी आंकड़ों के अनुसार 1,260 व्यक्तियों ने जान गंवाई थी और पूरा मुंगेर शहर मलवे में तब्दील हो गया था। उस भयानक घटना को आज 91 वर्ष बाद भी मुंगेर शहर भूल नहीं पाया है।
1934 के भूकंप में प्राकृतिक प्रकोप में जान गंवाने वाले मुंगेर शहर के नागरिकों की आत्मा की शांति और दोबारा मुंगेर शहर के नागरिकों को प्रकोप से बचाने के उद्देश्य से मुंगेर जिला मुख्यालय में 91 वर्षों से "भूकंप दिवस"लगातार मनाया जाता आ रहा है ।
इस भूकंप दिवस के मौके पर आज हजारों की संख्या में दरिद्र नारायण को भोज भी कराया गया।
हिंदू धर्म में मान्यता है कि दरिद्र नारायण का भोज कराने से मृत आत्माओं को शांति और सुकून की प्राप्ति होती है और ईश्वर की भी कृपा बनी रहती है।
मुंगेर के भाजपा विधायक कुमार प्रणय ने कहा कि मुंगेरवासी 1934 के बाद से लगातार भूकंप दिवस मनाते आ रहे हैं और दरिद्र नारायण का भोज कराते आ रहे हैं। दरिद्रनारायण का भोज कराने से ईश्वर की कृपा मुंगेर जिला मुख्यालय के नागरिकों पर भविष्य में बनी रहेगी और मुंगेर शहर प्राकृतिक प्रकोप से बचा रहे।
मुंगेर नगर निगम की मेयर कुमकुम देवी और भूकंप दिवस आयोजन समिति के संयोजक संजय कुमार बबलू ने कहा कि 1934 के भूकंप में जान गवाने वाले मुंगेर के नागरिकों की आत्मा की शांति के लिए हवन का कार्यक्रम भी किया गया।
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