श्री चमकौर साहिब/अमृतसर , सितंबर 03 -- श्री अकाल तख्त साहिब से शुरू हुआ मीरी-पीरी खालसा मार्च दूसरे चरण के तहत गुरुद्वारा श्री कतलगढ़ साहिब, श्री चमकौर साहिब में रात्रि विश्राम के बाद गुरुवार को धार्मिक परंपराओं के साथ अपने अगले पड़ाव गुरुद्वारा श्री भट्ठा साहिब, रोपड़ के लिए रवाना हुआ।

मार्च की शुरुआत से पहले आयोजित धार्मिक दीवान में सचखंड श्री हरमंदिर साहिब के ग्रंथी ज्ञानी केवल सिंह ने संगत को गुर इतिहास से अवगत कराया और गुरमत के अनुसार जीवन जीने के लिए प्रेरित किया।

इस अवसर पर श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने कहा कि श्री चमकौर साहिब की यह धरती सिखों की अद्वितीय बहादुरी, दृढ़ विश्वास और शहादत की मिसाल है। उन्होंने कहा कि इसी धरती पर दसवें पातशाह श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपने साहिबजादों को स्वयं युद्ध के लिए भेजा और उनकी शहादत पर जयकारे लगाये गये। उन्होंने कहा कि गुरु साहिब का आशीर्वाद लेकर गुरु के 40 सिंहों ने यहां बड़ी सेना का मुकाबला किया।

ज्ञानी गड़गज्ज ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को शहीदों की इस पवित्र धरती से प्रेरणा लेने की जरूरत है। श्री अकाल तख्त साहिब से शुरू किया गया मीरी-पीरी खालसा मार्च सिख सिद्धांतों के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ सिखी से दूर हो रहे युवाओं को अपने विरासत से जोड़ने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि चमकौर साहिब की गढ़ी से यह प्रेरणा लेने की जरूरत है कि मुश्किलें कितनी भी बड़ी क्यों न हों, यदि गुरु पर विश्वास और इरादे दृढ़ हों तो कोई ताकत हमें पराजित नहीं कर सकती। उन्होंने सिखों को श्री गुरु ग्रंथ साहिब, गुरु पंथ और श्री अकाल तख्त साहिब के प्रति निष्ठावान रहने तथा बाणी-बाणे से जुड़कर गुरमत के अनुसार जीवन जीने के लिए प्रेरित किया।

मीरी-पीरी खालसा मार्च के विभिन्न पड़ावों पर संगत ने गर्मजोशी से स्वागत किया और गुरु साहिब के प्रति सम्मान प्रकट किया। मार्ग में संगत की ओर से सजावटी द्वार बनाए गए और विभिन्न प्रकार के पकवानों के लंगर लगाये गये। मार्च के साथ चल रही गुरु साहिबान के ऐतिहासिक शस्त्रों वाली बस को लेकर भी संगत में खासा उत्साह देखा गया।

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