श्रीनगर , सितंबर 18 -- कश्मीर के मुख्य धर्मगुरु मीरवाइज उमर फारूक ने शुक्रवार को लोगों से मुत्तहिदा मजलिस-ए-उलेमा (एमएमयू) जम्मू-कश्मीर की ओर से हाल में शुरू की गयी सामाजिक सुधार पहलों का समर्थन करने और उनमें सक्रिय रूप से भाग लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि सार्थक बदलाव के लिए समाज की सामूहिक भागीदारी जरूरी है।

श्रीनगर की ऐतिहासिक जामिया मस्जिद में शुक्रवार की नमाज के दौरान लोगों को संबोधित करते हुए मीरवाइज ने कहा कि हाल में हुई उलेमा की एक बैठक में विभिन्न क्षेत्रों और विचारधाराओं के विद्वानों ने नशे की लत, युवाओं में आत्महत्या और मानसिक तनाव, सोशल मीडिया के दुरुपयोग, परिवारों के बीच कमजोर होते संबंध, पर्यावरण में गिरावट और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने की जरूरत सहित कई गंभीर सामाजिक मुद्दों पर चर्चा की।

उन्होंने कहा कि केवल सम्मेलन और प्रस्ताव बदलाव नहीं ला सकते, जब तक लोग स्वयं इस प्रयास का हिस्सा नहीं बनते। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य चिंता और चर्चा को परिवारों, मस्जिदों, मोहल्लों और समुदायों में व्यावहारिक कार्रवाई में बदलना है। मीरवाइज ने कहा कि सुधार की शुरुआत खुद से होनी चाहिए और समाज हमेशा दूसरों के कदम उठाने का इंतजार नहीं कर सकता।

उन्होंने कहा, "हमें मिलकर सोचना और काम करना होगा। उलेमा, माता-पिता, युवा, मस्जिद, मदरसे और बड़े समुदाय, खासकर माता-पिता, की भूमिका है।" उन्होंने कहा कि सामाजिक सुधार को एक साझा ज़िम्मेदारी माना जाना चाहिए। मीरवाइज़ ने कहा कि समाज को प्रभावित करने वाले मामलों पर लगातार ध्यान बनाए रखने के लिए शामिल मस्जिदों में शुक्रवार के भाषणों में आम सामाजिक मुद्दों को उठाया जाएगा। उन्होंने लोगों से इस पहल का समर्थन करने और चर्चाओं को अपने घरों और समुदायों तक ले जाने का आग्रह किया।

मीरवाइज़ ने ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेशकियन और विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ अपनी हालिया बैठकों के बारे में भी लोगों को बताया और कहा कि उन्होंने ईरान के लोगों के साथ एकजुटता दिखाई और कश्मीर तथा ईरान के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक संबंधों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि ईरानी नेतृत्व ने कश्मीर जाने में दिलचस्पी दिखाई है और उन्होंने उन्हें घाटी आने का न्योता दिया है। जामिया मस्जिद में ईरान, फ़िलिस्तीन, लेबनान, यमन, यूक्रेन और दुनिया के दूसरे संघर्ष प्रभावित हिस्सों में शांति और बेगुनाहों की जान जाने और दुख-तकलीफ़ को खत्म करने के लिए खास दुआ भी की गयी। सभा ने युद्ध और तबाही से प्रभावित लोगों के लिए दया, शांति, न्याय और राहत की प्रार्थना की।

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