श्रीनगर , मार्च 04 -- कश्मीर के मुख्य मौलवी मीरवाइज उमर फारूक ने बुधवार को अधिकारियों से ईरान के समर्थन में प्रदर्शन करने के आरोप में पकड़े गये बंदियों को रिहा करने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए निरंतर सेंसरशिप और दंड की अपनी नीति पर गंभीरता से पुनर्विचार करने का आग्रह किया।

जम्मू और कश्मीर में इस्लामी धार्मिक संगठनों के समूह मुत्ताहिदा मजलिस-ए-उलेमा (एमएमयू) के प्रमुख मीरवाइज ने ईरान की घटनाओं पर एकता और एकजुटता दिखाने के लिए केंद्र शासित प्रदेश के मुसलमानों की प्रशंसा की।

श्री मीरवाइज ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "कश्मीर की घाटी से लेकर पीर पंजाल और जम्मू तक ईरान की घटनाओं पर जम्मू और कश्मीर के मुसलमानों द्वारा दिखाए गए एकता सराहनीय है। यह हमारे समाज की जीवित नैतिकता को दर्शाता है, जो उत्पीड़न के खिलाफ मजबूती से और मजलूमों के साथ अटूट रूप से खड़ा है। पूरे क्षेत्र में देखी गई बंदी उस एकजुटता की एक शांतिपूर्ण और शक्तिशाली अभिव्यक्ति है।"मौलवी ने विरोध प्रदर्शनों से संबंधित गिरफ्तारियों और सोशल मीडिया प्रतिबंधों की निंदा की और नागरिक स्वतंत्रता तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के सम्मान का आह्वान किया।

श्री मीरवाइज ने कहा, "शांतिपूर्ण विरोध और भावनाओं की अभिव्यक्ति के अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए। महिलाओं और नाबालिगों सहित प्रदर्शनकारियों और शोक मनाने वालों को हिरासत में लिए जाने की खबरें दुर्भाग्यपूर्ण और अनुचित हैं।" उन्होंने कहा कि अधिकारियों को हिरासत में लिए गए सभी लोगों को रिहा करना चाहिए और निरंतर सेंसरशिप और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए दंड की अपनी नीति पर गंभीरता से दोबारा गौर करना चाहिए।

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