श्रीनगर , जून 11 -- हुर्रियत चेयरमैन मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़ ने गुरुवार को दिल्ली उच्च न्यायालय के उस फ़ैसले का स्वागत किया जिसमें कश्मीरी मानवाधिकार कार्यकर्ता खुर्रम परवेज़ को आतंकी साज़िश के मामले में ज़मानत दी गई है।
इस मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी कर रही है।
एक्स पर एक पोस्ट में मीरवाइज़ ने इस घटनाक्रम को बहुत अच्छी खबर बताया और कहा कि परवेज़ और उनके परिवार ने उनकी कैद के दौरान वर्षों तक बहुत तकलीफ़ें झेली हैं।
मीरवाइज़ ने कहा, "लेकिन अदालतों से ज़मानत मिलने के बावजूद लोगों को दूसरे मामलों में फिर से गिरफ़्तार कर लिया जाता है ताकि वे जेल में ही रहें जैसा कि हमने शब्बीर शाह साहब के मामले में देखा तो यह न्याय के मक़सद के ख़िलाफ़ है। उम्मीद है कि उनके मामले में ऐसा नहीं होगा।"उन्होंने आशा व्यक्त किया कि सभी राजनीतिक कैदी, युवा और सैकड़ों अन्य लोग जो कानूनी समाधान का इंतज़ार करते हुए सालों से जेल में हैं उन्हें राहत मिलेगी और वे अपने परिवारों से फिर मिल सकेंगे।
श्रीनगर के सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी के ऑफ़िस ने भी उच्च न्यायालय के आदेश का स्वागत करते हुए इसे एक अहम एवं स्वागत योग्य कदम करार दिया। सांसद के ऑफ़िस ने कहा कि अदालत ने फिर से यह बात दोहराई है कि ज़मानत मिलना नियम है, अपवाद नहीं और उम्मीद जताई कि परवेज़ को 2020 में उनके ख़िलाफ़ दर्ज दूसरे यूएपीए मामले में भी ज़मानत मिल जाएगी।
सांसद ने कहा, "खुर्रम, उनके परिवार और कानूनी टीम को बधाई। हमें पूरी उम्मीद है कि 2020 में दर्ज दूसरे यूएपीए मामले में उन्हें जल्द ही ज़मानत मिल जाएगी ताकि इतने सालों तक हिरासत में रहने के बाद वह आखिरकार आज़ाद हो सकेंगे।"एनआईए मामले में गिरफ़्तारी के साढ़े चार साल बाद, बुधवार को दिल्ली उच्च न्यायालय ने परवेज़ को ज़मानत दे दी। हालांकि, वह 2020 के एक और एनआईए मामले में वह हिरासत में ही रहेंगे; इस केस में उन्हें 2023 में तब औपचारिक रूप से गिरफ़्तार किया गया था जब वह पहले से ही जेल में थे। उस केस में उनकी ज़मानत अर्ज़ी अभी भी ट्रायल कोर्ट में लंबित है।
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