संतकबीरनगर , जुलाई 7 -- उत्तर प्रदेश के संतकबीरनगर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बीमा पॉलिसी की मिस-सेलिंग के मामले में बीमा कंपनी के खिलाफ फैसला सुनाते हुए जमा प्रीमियम की राशि 10.45 लाख रुपये 10 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाने तथा 60 हजार रुपये क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया है।

जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष सुरेंद्र कुमार सिंह और महिला सदस्य संतोष की पीठ ने यह आदेश खलीलाबाद के पटखौली स्थित अशोका हॉस्पिटल के संचालक चिकित्सक डॉ. अशोक कुमार द्वारा दायर परिवाद पर सुनवाई के बाद दिया। परिवाद के अनुसार, 21 दिसंबर 2022 को टाटा एआईए लाइफ इंश्योरेंस के अधिकृत प्रतिनिधि अस्पताल पहुंचे और उन्हें स्मार्ट संपूर्ण रक्षा प्लान के तहत 75 लाख रुपये के मैच्योरिटी बेनिफिट वाली पॉलिसी के लाभ बताए। आरोप है कि इसे एकल प्रीमियम (सिंगल प्रीमियम) पॉलिसी बताकर 5,22,500 रुपये का प्रीमियम जमा कराया गया।

परिवादी ने आरोप लगाया कि प्रस्ताव प्रपत्र (प्रपोजल फॉर्म) में कई त्रुटियां थीं और पॉलिसी दस्तावेजों पर उनके हस्ताक्षर भी नहीं कराए गए। साथ ही पॉलिसी बॉन्ड फ्री-लुक अवधि समाप्त होने के बाद भेजा गया, जिससे वह निर्धारित समय के भीतर पॉलिसी निरस्त नहीं करा सके। इसके बाद उन्हें अगले वर्ष का प्रीमियम भी जमा करना पड़ा और कुल 10.45 लाख रुपये का भुगतान करना पड़ा।

परिवाद में यह भी कहा गया कि जिस सर्विसिंग एजेंट अथवा इंश्योरेंस ब्रोकर का नाम पॉलिसी में दर्ज है, उससे उनकी कभी मुलाकात नहीं हुई। वर्ष 2024 में उन्होंने दोनों प्रीमियम की राशि वापस करने की मांग की, लेकिन बीमा कंपनी ने भुगतान नहीं किया, जिसके बाद उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया गया।

सुनवाई के बाद आयोग ने बीमा कंपनी को निर्देश दिया कि वह 10.45 लाख रुपये की जमा प्रीमियम राशि का भुगतान 11 जनवरी 2024 से अंतिम भुगतान की तिथि तक 10 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित 60 दिनों के भीतर करे। इसके अलावा परिवादी को मानसिक एवं आर्थिक क्षति के लिए 60 हजार रुपये क्षतिपूर्ति भी अदा की जाए।

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