धारीवाल/अमृतसर , सितंबर 22 -- मिरी-पीरी खालसा मार्च तीसरे चरण के तहत मंगलवार को गुरुद्वारा बुर्ज साहिब धारीवाल से जयकारों के बीच अगले पड़ाव गुरुद्वारा पातशाही पांचवीं ओठियां (बटाला) के लिए रवाना हुआ।
मार्च की शुरुआत के अवसर पर श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज, तख्त श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार ज्ञानी टेक सिंह, सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब के ग्रंथी ज्ञानी गुरमिंदर सिंह सहित प्रमुख धार्मिक हस्तियां और बड़ी संख्या में संगत मौजूद रही।
इस अवसर पर धार्मिक दीवान में ज्ञानी गुरमिंदर सिंह ने गुर-इतिहास से संगत को अवगत कराया और गुरबाणी तथा सिख जीवन-शैली से जुड़ने की प्रेरणा दी। मुख्य प्रचारक भाई सरबजीत सिंह ढोटियां ने भी संगत के साथ इतिहास की जानकारी साझा की।
ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने कहा कि छठे गुरु श्री गुरु हरगोबिंद साहिब ने मिरी-पीरी के सिद्धांत को व्यावहारिक रूप देते हुए संत-सिपाही की अवधारणा दुनिया के सामने रखी और श्री अकाल तख्त साहिब की स्थापना के माध्यम से सिखों को अन्याय और अत्याचार के खिलाफ खड़े होने की प्रेरणा दी।
उन्होंने कहा कि गुरु साहिबान का दर्शन 'नाम जपो, किरत करो और वंड छको' आध्यात्मिकता के साथ सामाजिक जिम्मेदारी का भी बोध कराता है। उन्होंने कहा कि मिरी-पीरी खालसा मार्च का संदेश है कि सिख गुरु के सिद्धांतों से जुड़कर नाम, बाणी, सेवा और संगत के मार्ग पर चलें। उन्होंने युवाओं को नशे से बचाने तथा उन्हें गुरबाणी, गुरसिखी और खेलों से जोड़ने को सामूहिक जिम्मेदारी बताया। उन्होंने कहा कि पंजाब की युवा पीढ़ी को नशे की गिरफ्त में धकेलने वाली ताकतों के खिलाफ एकजुट होना समय की जरूरत है।
इस अवसर पर ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज और ज्ञानी टेक सिंह ने पांच प्यारों तथा निशानची सिंहों को सिरोपे देकर सम्मानित किया। श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पावन स्वरूप को पालकी साहिब में सुशोभित करने की सेवा ज्ञानी गुरमिंदर सिंह ने निभाई।
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