दरभंगा , सितंबर 18 -- ज्ञानभारतम् मिशन के तहत राष्ट्रीय पाण्डुलिपि सर्वे के क्रम में मिथिला संस्कृत स्नातकोत्तर अध्ययन एवं शोध संस्थान, दरभंगा में सर्वेक्षित पाण्डुलिपियों के डिजिटाइजेशन कार्य का उद्घाटन शुक्रवार को जिलाधिकारी कौशल कुमार और संस्थान के निदेशक डॉ. सुरेन्द्र प्रसाद सुमन ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया।इस अवसर पर जिलाधिकारी ने संस्थान की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत में पाण्डुलिपियों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए इनके संरक्षण और डिजिटाइजेशन को आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि पुरानी पाण्डुलिपियां मिथिला की समृद्ध ज्ञान परंपरा, संस्कृति, साहित्य एवं इतिहास की महत्वपूर्ण धरोहर हैं। डिजिटाइजेशन से इनका दीर्घकालिक संरक्षण सुनिश्चित होने के साथ शोधार्थियों और अध्येताओं के लिए इनकी उपलब्धता भी सुगम होगी।

संस्थान के निदेशक डॉ. सुमन ने बताया कि राष्ट्रीय पाण्डुलिपि सर्वे के दौरान संस्थान में उपलब्ध पाण्डुलिपियों का सर्वेक्षण किया गया है। अब सर्वेक्षित पाण्डुलिपियों को डिजिटल स्वरूप प्रदान करने का कार्य शुरू किया गया है। इससे दुर्लभ एवं प्राचीन पाण्डुलिपियों को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए यह ज्ञान-संपदा संरक्षित रह सकेगी।

मिथिला संस्कृत स्नातकोत्तर अध्ययन एवं शोध संस्थान मिथिला की संस्कृत एवं शास्त्रीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण, अध्ययन और शोध की दृष्टि से महत्वपूर्ण संस्थान है। संस्थान में संस्कृत साहित्य, दर्शन, व्याकरण, ज्योतिष, धर्मशास्त्र सहित विभिन्न विषयों से संबंधित दुर्लभ एवं प्राचीन पाण्डुलिपियां संरक्षित हैं।

इस अवसर पर सहायक समाहर्ता कल्पना रावत, जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी सह नोडल पदाधिकारी चन्द्रन कुमार, सीबीएसपीएल ग्रुप के प्रोजेक्ट हेड एजाज अहमद, चन्द्रधारी संग्रहालय के रविकान्त, संस्थान की परामर्शदातृ समिति के सदस्य डॉ. रामबाबू आर्य, पूर्व निदेशक राजदेव प्रसाद तथा पाण्डुलिपि अनुभाग के प्रभारी-सह-प्रधान लिपिक नेती कामति सहित संस्थान के कर्मी उपस्थित थे।

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