दरभंगा , जनवरी 28 -- बिहार के प्रतिष्ठित ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (एलएनएमयू) के कुलपति प्रोफेसर संजय कुमार चौधरी ने बुधवार को कहा कि मिथिला का प्राचीन इतिहास ज्ञान-परंपरा का स्वर्णिम युग रहा है।
प्रोफेसर श्री चौधरी ने आज (एलएनएमयू) की अधिषद् (सीनेट) की बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि मिथिला का प्राचीन इतिहास ज्ञान-परंपरा का स्वर्णिम युग रहा है। उन्होंने कहा कि दर्शन और बौद्धिक चिंतन के क्षेत्र में मिथिला भारत का प्रतिनिधित्व करता था। आज जब भारत विश्वगुरु बनने की दिशा में अग्रसर है, तब मिथिला के छात्र-छात्राओं पर भी बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की स्थापना जिन उद्देश्यों के साथ की गई थी, वे उत्तर-आधुनिक युग में साकार होते दिखाई दे रहे हैं।
प्रोफेसर चौधरी ने बताया कि ठीक एक वर्ष पूर्व 27 जनवरी 2025 को सीनेट में विश्वविद्यालय के सर्वांगीण विकास के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए थे, जिनका सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगा है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप एलएनएमयू को बहुविषयक शिक्षा एवं शोध विश्वविद्यालय के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य जारी है। महिला छात्रावास और सोशल साइंस ब्लॉक का निर्माण, प्रयोगशालाओं का सुदृढ़ीकरण तथा केन्द्रीय पुस्तकालय का आधुनिकीकरण इसकी प्रमुख कड़ियां हैं। पुस्तकालय के अंतर्गत ई-लर्निंग लैब से छात्र लाभान्वित हो रहे हैं।
प्रो. चौधरी ने कहा कि एडवांस रिसर्च सेंटर स्थापित करने वाला एलएनएमयू राज्य का इकलौता विश्वविद्यालय है। यहां स्थापित रिमोट सेंसिंग लैब के माध्यम से शोधार्थियों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान प्राप्त हुआ है। ऑडियो-वीडियो लैब का भी विकास किया गया है, जिसके तहत भविष्य में पाठ्यक्रम आधारित व्याख्यान विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर उपलब्ध कराए जाएंगे।उन्होंने बताया कि एनईपी-2020 के तहत 'स्वयं-एमओओसी' को अपनाने वाला एलएनएमयू राज्य का पहला विश्वविद्यालय है। इससे छात्र अतिरिक्त अध्ययन कर सकेंगे और उसका क्रेडिट उनके अकादमिक रिकॉर्ड में जोड़ा जाएगा। प्रशासनिक सुधारों के तहत समर्थ पोर्टल के माध्यम से कार्यालयीय कार्य संपादित किए जा रहे हैं।
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