आइजॉल , जुलाई 17 -- मिजोरम में रबर की खेती को और अधिक बढ़ावा दिया जायेगा, जिससे यहां के किसानों की आमदनी में इजाफा होगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में तब्दीली आयेगी।
मिजोरम सरकार ने 'मुख्यमंत्री रबर अभियान' के जरिए देहात के इलाकों की आमदनी बढ़ाने की अपनी कोशिशों को तेज कर दिया है। सरकार ने एक पांच साल तक चलने वाली एक महत्वाकांक्षी योजना बनायी है, जिसका मकसद किसानों को शुरुआत से आखिर तक पूरी तरह मदद देते हुए रबर के बागानों का 11,500 हेक्टेयर क्षेत्र में विस्तार करना है।
भूमि संसाधन, मृदा और जल संरक्षण विभाग के अनुसार, मिजोरम में किसानों के लिए आय के एक और जरिए के रूप में वर्ष 1982 में रबर की खेती की शुरुआत की गयी थी। विभाग का अंदाजा है कि राज्य में लगभग 50 हजार हेक्टेयर भूमि रबर की खेती के लिए उपयुक्त है, लेकिन अब तक महज सात हजार हेक्टेयर क्षेत्र में यह खेती की जा रही है।
साल 2025 के प्रारंभ में शुरू हुए पहले चरण के अंतर्गत 936 किसान परिवारों को मामित और कोलासिब जिलों में 1,000 हेक्टेयर क्षेत्र में शामिल किया गया। इसमें 24 बागान समूहों में लगभग 4.50 लाख रबर के पौधे रोपे गये थे। सरकार ने अब इसके दूसरे चरण का बिगुल बजा दिया है। इसका लक्ष्य आठ जिलों के 119 समूहों में रबर की खेती के तहत अतिरिक्त 2,649 हेक्टेयर क्षेत्र को जोड़ना है। इस चरण में लगभग 2,580 किसान भाग ले रहे हैं, जिन्हें करीब 11.9 लाख पौधे बांटे जाएंगे।
इस अभियान में शामिल होने वाले किसानों को रबर के पौधे, उर्वरक, पादप संरक्षण रसायन तथा बागान के विकास, घेराबंदी, रखरखाव और अन्य कामों के लिए चार सालों तक वित्तीय सहायता दी जाती है। यह सहायता किसानों के बैंक खातों में भेजी जाती है। सरकार इसी साल 100 रबर प्रसंस्करण मशीन सेट खरीदने की भी योजना बना रही है, जो उन किसानों को मिलेंगे जिनके बागान पूरी तरह तैयार हो चुके हैं, लेकिन उनके पास प्रसंस्करण की सुविधा उपलब्ध नहीं है। वर्तमान में वर्ष 2027 में शुरू होने वाले तीसरे चरण के लिए लाभार्थियों की पहचान करने हेतु सर्वेक्षण का कार्य चल रहा है।
विभाग ने बताया कि रबर की खेती से न केवल किसानों को आय का एक अच्छा जरिया मिलता है, बल्कि इससे बंजर भूमि को दोबारा उपजाऊ बनाने, जल स्रोतों को संरक्षित करने, मिट्टी के कटान को रोकने और झूम (बदल-बदल कर की जाने वाली) खेती पर निर्भरता को कम करने में भी सहायता मिलती है। इस अभियान की परिकल्पना मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने दिसंबर 2023 में रबर बोर्ड के अध्यक्ष सावर धननिया से भेंट कर त्रिपुरा के सफल रबर विकास मॉडल का अध्ययन करने के बाद की थी। इसके बाद अध्ययन दौरों और भारतीय रबर बोर्ड के साथ विचार-विमर्श के बाद, राज्य मंत्रिमंडल ने अक्टूबर 2024 में इस अभियान को स्वीकृति दी थी, और उसी वर्ष दिसंबर में इसे औपचारिक रूप से आरंभ किया गया था।
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