आइजोल , फरवरी 24 -- मिजोरम सरकार ने सरकारी कार्यालयों में दूसरे के स्थान पर काम करने (प्रॉक्सी रोजगार) के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए राज्य सरकार ने 29 कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया है तथा अपने आधिकारिक कर्तव्यों का पालन करने के लिए किसी और को (सब्सटिट्यूट) लगाने के जुर्म में आठ अन्य कर्मचारियों को दंडित किया है।

कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग (डीपी एंड एआर) के मंत्री के. सपनाडांगा ने मंगलवार को प्रश्नकाल के दौरान सदन को बताया कि जहां 29 कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है, वहीं आठ अन्य को मामूली दंड दिया गया है। हालांकि, इन कम सजाओं को भी उनकी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) में दर्ज किया गया है, जो संभावित रूप से उनकी भविष्य की पदोन्नति और करियर की प्रगति को प्रभावित कर सकती हैं।

मंत्री ने कहा कि प्रॉक्सी की नियुक्ति की निगरानी करना और उसे रोकना विभाग के सचिवों, विभागाध्यक्षों और नियंत्रण अधिकारियों की जिम्मेदारी है। उन्होंने संकेत दिया कि प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई इस कदाचार को समाप्त करने की कुंजी है।

यह कार्रवाई जोराम पीपुल्स मूवमेंट (जेडपीएम) सरकार के एक नीतिगत निर्णय के बाद हुई है, जिसने 2023 के अंत में सत्ता ग्रहण किया था और सार्वजनिक सेवा में अपनी जगह किसी और की नियुक्ति की प्रणाली को समाप्त करने का वादा किया था। उसी प्रतिबद्धता पर कार्रवाई करते हुए, विभाग ने 19 जून 2024 को एक ज्ञापन जारी कर सरकारी कर्मचारियों को प्रॉक्सी या एवजी नियुक्त करने से औपचारिक रूप से प्रतिबंधित कर दिया था।

जनवरी 2025 में राज्य सरकार के 44 विभागों में संकलित आधिकारिक आंकड़ों से इस समस्या के पैमाने का खुलासा हुआ। पाया गया कि 3,365 कर्मचारियों ने एवजी नियुक्त किए थे। इनमें से 2,070 ने स्वास्थ्य संबंधी कारणों का हवाला दिया। अन्य 703 ने इसके लिए पारिवारिक समस्याओं को जिम्मेदार ठहराया, जबकि 350 ने कहा कि व्यक्तिगत कठिनाइयों के कारण उन्हें प्रॉक्सी रखने पड़े। नौ मामलों में पाया गया कि मूल कर्मचारियों की मृत्यु के बाद भी प्रॉक्सी कार्यकर्ता सेवा में बने रहे। एक अन्य संवेदनशील खुलासे में, पादरियों की छह पत्नियां स्कूल शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में एवजी नियुक्त करते हुए पाई गईं।

उन्होंने उल्लेख किया कि मिजोरम में प्रेस्बिटेरियन और बैपटिस्ट चर्चों के साथ-साथ यूनाइटेड पेंटेकोस्टल चर्च (यूपीसी) निकायों सहित कुछ प्रमुख चर्च संप्रदाय पादरियों के जीवनसाथी को सरकारी नौकरी रखने की अनुमति नहीं देते हैं, जिसके कारण इन कर्मचारियों ने प्रॉक्सी नियुक्त किए। कुछ सरकारी कर्मचारियों द्वारा इवेंजलिज्म जैसी धार्मिक गतिविधियों को करने के लिए भी एवजी लगाने की सूचना मिली थी।

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