आइजोल , जून 17 -- मिजोरम की एकमात्र राज्यसभा सीट पर गुरुवार को होने वाले चुनाव में सत्तारूढ़ जोराम पीपुल्स मूवमेंट (जेडपीएम) और विपक्षी मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) के बीच सीधा मुकाबला होने जा रहा है जबकि भाजपा तथा कांग्रेस ने इस सीट के लिए होने वाले मतदान से दूर रहने का फैसला किया है।

चालीस सदस्यीय मिजोरम विधानसभा में भाजपा के दो विधायक हैं, जबकि कांग्रेस का एक विधायक है। दोनों दलों के मतदान में भाग ने लेने के फैसले की वजह से मिजोरम की एकमात्र राज्यसभा सीट के लिए होने वाले मुकाबले को मुख्य रूप से सत्तारूढ़ जेडपीएम और एमएनएफ के बीच ही सीमित कर दिया है।

राज्य के भाजपा नेताओं ने कहा कि पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, मिजोरम भाजपा के अध्यक्ष एवं विधायक के. बेचुआ और विधायकत के. ह्राख्मो मतदान से दूर रहेंगे। यह फैसला तब आया है जब एमएनएफ केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का सहयोगी होने के साथ-साथ उत्तर पूर्व लोकतांत्रिक गठबंधन (नेडा) का भी एक घटक है।

मिजोरम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एमपीसीसी) ने भी घोषणा की कि बुधवार को आयोजित उसकी राजनीतिक मामलों की समिति की बैठक में यह फैसला किया गया है कि उनकी पार्टी के एकमात्र विधायक, सी. नगुनलियानचुंगा, चुनाव मैदान में मौजूद दोनों उम्मीदवारों में से किसी का समर्थन नहीं करेंगे और मतदान में भी हिस्सा नहीं लेंगे।

एमपीसीसी ने एक बयान में कहा कि उसे कांग्रेस विधायक का समर्थन मांगने के लिए एमएनएफ से एक औपचारिक अनुरोध प्राप्त हुआ था। एमपसीसी पार्टी के आंतरिक विचार-विमर्श से इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि एमएनएफ या सत्तारूढ़ जेडपीएम में से किसी का भी समर्थन करना अप्रत्यक्ष रूप से भाजपा का समर्थन करने के समान होगा, क्योंकि दोनों दल एनडीए के साथ राजनीतिक संबंध रखते हैं।

बयान में कहा गया, "गहन विचार-विमर्श के बाद यह निर्णय लिया गया है कि चूंकि एमएनएफ और जेडपीएम दोनों के संबंध एनडीए से हैं, इसलिए किसी भी उम्मीदवार का समर्थन करना अंततः भाजपा का समर्थन करने जैसा होगा। इसलिए, एकमात्र कांग्रेस विधायक राज्यसभा चुनाव में मतदान से दूर रहेंगे।"एक स्थानीय टेलीविजन चैनल के साथ एक साक्षात्कार के दौरान जेडपीएम उम्मीदवार के. लालतलुआंगकिमा द्वारा कथित तौर पर की गई टिप्पणियों के बाद मतदान से पहले एक नया विवाद खड़ा हो गया। कथित बयान के अनुसार, उन्होंने सुझाव दिया कि यदि कोई जेडपीएम विधायक दल बदल कर मतदान करता है, तो ऐसे वोटों को अमान्य माना जायेगा।

राज्यसभा चुनाव के लिए एमएनएफ की चुनाव एजेंट ईवा तोछावंग ने इस बयान को "झूठा, निराधार और खेदजनक" बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि विधायकों के लिए मतपेटी में मतपत्र डालने से पहले अपनी पार्टी के अधिकृत चुनाव एजेंट को अपना चिन्हित मतपत्र दिखाना आवश्यक होगा।

सुश्री तोछावंग ने कहा, "विधायकों के लिए अब यह अनिवार्य है कि उन्होंने किसे वोट दिया है, यह अपनी पार्टी के अधिकृत चुनाव एजेंट को दिखायें। यदि वे ऐसा करने से इनकार करते हैं, तो उनका वोट अमान्य हो जाएगा। हालांकि, क्रॉस-वोटिंग कानूनी रूप से स्वीकार्य है और यह दल-बदल विरोधी कानून के दायरे में नहीं आती है।"सत्तारूढ़ जेडपीएम के पास 27 विधायकों के साथ विधानसभा में बहुमत है। विपक्षी एमएनएफ के 10 सदस्य हैं। भाजपा के दो और कांग्रेस के एक विधायक के साथ विधानसभा की कुल संख्या 40 है।

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