फगवाड़ा , अक्टूबर 29 -- पंजाब के गजटेड एवं नॉन-गजटेड एससी/बीसी कर्मचारी कल्याण महासंघ ने 4161 मास्टर कैडर भर्ती प्रक्रिया के तहत नियुक्त 253 शिक्षकों की सेवाएं समाप्त करने के फैसले की निंदा करते हुए सरकार से इसे मानवीय आधार पर वापस लेने की मांग की है।
महासंघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं कपूरथला जिला इकाई के अध्यक्ष सतवंत तूरा ने गुरुवार को अन्य पदाधिकारियों के साथ पत्रकारों से बातचीत में कहा कि शिक्षा विभाग ने बुधवार को शिक्षकों की सेवाएं समाप्त करने के आदेश जारी किए। उनके अनुसार, ये शिक्षक करीब तीन साल से विभाग में सेवाएं दे रहे थे और परिवीक्षा अवधि पूरी होने से एक दिन पहले ही उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किए गए।
श्री तूरा ने कहा कि संबंधित शिक्षकों का चयन विभाग की ओर से जारी मेरिट सूची के आधार पर निर्धारित पात्रता और भर्ती शर्तें पूरी करने के बाद हुआ था। ऐसे में भर्ती प्रक्रिया में कथित खामियों के लिए शिक्षकों को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। उन्होंने सरकार की शिक्षा क्रांति संबंधी दावों और शिक्षकों की सेवाएं समाप्त करने के फैसले पर भी सवाल उठाए।
महासंघ के अनुसार, मई 2023 में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद शिक्षा विभाग ने निजी कंपनी एनआईईएलआईटी की उत्तर कुंजी को खारिज कर दिया था। इसके बाद विषय विशेषज्ञों की मदद से त्रुटियां सुधारकर संशोधित उत्तर कुंजी तैयार की गई, जिसे विभाग ने स्वीकार किया था। महासंघ के नेताओं ने आरोप लगाया कि बाद में विभाग ने संशोधित उत्तर कुंजी को खारिज कर फिर से एनआईईएलआईटी की उत्तर कुंजी पर भरोसा किया, जिसके चलते 253 शिक्षकों की सेवाएं समाप्त करने की नौबत आई।
श्री तूरा ने कहा कि शिक्षा विभाग में विभिन्न विषयों के हजारों पद खाली हैं। ऐसे में प्रभावित शिक्षकों को बर्खास्त करने के बजाय रिक्त पदों पर समायोजित किया जाना चाहिए। यदि मेरिट सूची तैयार करने में कोई अनियमितता हुई है तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की तय की जानी चाहिए।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित