उज्जैन , जुलाई 10 -- मध्यप्रदेश के उज्जैन की एक स्थानीय अदालत ने नगर निगम के फायर सेफ्टी अधिकारी के साथ कथित मारपीट कर शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने के आरोपी होटल संचालक की जमानत याचिका निरस्त कर उसे केंद्रीय भैरवगढ़ जेल भेजने के आदेश दिए।
प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट राघवेन्द्र पटेल ने आरोपी ब्रजेन्द्र उर्फ विकास अरोण्या की जमानत याचिका भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं 132, 121(1), 115(2) एवं 324(3) के तहत निरस्त कर दी।
सहायक जिला अभियोजन अधिकारी हार्दिक देवकर ने बताया कि आरोपी पर शासकीय अधिकारी के साथ मारपीट करने तथा शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने का आरोप है। शासन की ओर से जमानत का विरोध प्रभारी उप संचालक (अभियोजन) राजेन्द्र कुमार खाण्डेगर के निर्देशन में सहायक जिला अभियोजन अधिकारी शैलेन्द्र जीनवाल ने किया। न्यायालय ने प्रस्तुत तथ्यों से सहमत होते हुए आरोपी को न्यायिक अभिरक्षा में केंद्रीय भैरवगढ़ जेल भेजने के आदेश दिए।
अभियोजन के अनुसार, आठ जुलाई को नगर निगम के फायर सेफ्टी अधिकारी लक्ष्मण प्रसाद साहू नियमित फायर सेफ्टी ऑडिट के लिए जयसिंहपुरा स्थित होटल पितांबरा रेसिडेंसी पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने होटल के फायर सेफ्टी प्रमाणपत्र, फायर ऑडिट रिपोर्ट और भवन निर्माण अनुमति से संबंधित दस्तावेज मांगे। आरोप है कि इसी बात पर होटल संचालक के पुत्र ब्रजेन्द्र उर्फ विकास अरोण्या ने उनके साथ हाथापाई की, दस्तावेज बाहर फेंक दिए तथा उनका वायरलेस सेट और चश्मा तोड़ दिया।
मारपीट में अधिकारी के चेहरे पर भी चोट आई। घटना की सूचना पर नगर निगम और पुलिस के अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज जब्त कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
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