वाशिंगटन , जुलाई 16 -- भारत के अरबपति उद्यमी गौतम अडानी ने अमेरिका की अदालत में एक हलफनामे में स्वीकार किया है कि उनके वकीलों ने उनके खिलाफ चल रहे आपराधिक मामले का निपटारा करने के लिए न्याय विभाग (डीओजे) के अभियोजकों को अमेरिका में 10 अरब डॉलर निवेश करने की पेशकश की थी। अमेरिकी मीडिया ने यह जानकारी दी है।

उन्होंने लेकिन यह भी कहा है कि अभियोजकों ने औपचारिक रूप से उनकी ओर से रखे गये इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था, हालांकि, उन्होंने अलग आधारों का हवाला देते हुए मामला वापस लेने पर सहमति जतायी।

श्री अडानी की ओर से हलफनामें में हालांकि यह भी कहा गया है कि अगर डीओजे या प्रतिभूति और विनिमय आयोग (एसईसी) यही चाहते रहे हों तो 'वह सुझाया गया (निवेश का) प्रस्ताव उनके खिलाफ चल रहे आपराधिक और दीवानी मामलों के "समाधान का हिस्सा हो सकता है ।"अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, श्री अडानी ने शपथपत्र में कहा है कि उनके वकीलों ने बातचीत के दौरान यह सुझाव दिया था कि यदि डीओजे या अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (एसईसी) चाहे तो अमेरिका में 10 अरब डॉलर के निवेश की उनकी सार्वजनिक प्रतिबद्धता को आपराधिक और दीवानी मामलों के समाधान का हिस्सा बनाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि बाद में न्याय विभाग ने उनके वकीलों को स्पष्ट कर दिया था कि मामले को वापस लेने पर निर्णय करते समय प्रस्तावित निवेश पर कोई विचार नहीं किया जाएगा। श्री अडानी ने कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार न्याय विभाग द्वारा मामला वापस लेने के निर्णय में इस निवेश प्रस्ताव की कोई भूमिका नहीं रही।

श्री अडानी ने अदालत को बताया कि यह प्रस्ताव उनके 13 नवंबर 2024 के सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़ा था, जिसमें उन्होंने अमेरिका के ऊर्जा सुरक्षा और सुदृढ़ बुनियादी ढांचा क्षेत्र में 10 अरब डॉलर निवेश करने तथा लगभग 15 हजार रोजगार सृजित करने की संभावना जतायी थी। उन्होंने कहा कि यह घोषणा करते समय उन्हें अपने खिलाफ अभियोग और एसईसी की शिकायत की जानकारी नहीं थी।

डीओजे के अभियोग के अनुसार, 17 मार्च 2023 को एफबीआई एजेंटों ने श्री अडानी के भतीजे एवं सह-अभियुक्त सागर अडानी के यहां तलाशी वारंट के साथ पहुंचकर उनके इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किये थे और उन्हें जांच से संबंधित वारंट सौंपा था।

इस बीच, अमेरिकी जिला न्यायाधीश निकोलस जी. गराउफिस ने श्री गौतम अडानी से यह स्पष्ट करने को कहा था कि क्या न्याय विभाग द्वारा मामला वापस लेने के बदले किसी प्रकार का कोई लेन-देन की बात तय हुई थी। अदालत ने उनसे यह भी पूछा था कि क्या अभियोग वापस लेने के बदले किसी प्रकार का वादा, प्रस्ताव, समझौता या लेन-देन हुआ था।

अमेरिकी न्याय विभाग ने चार जुलाई को अदालत में कहा था कि श्री अडानी के खिलाफ आपराधिक मामला कानूनी रूप से कमजोर, कूटनीतिक दृष्टि से प्रतिकूल और ट्रंप प्रशासन की प्रवर्तन प्राथमिकताओं के अनुरूप नहीं था। विभाग ने अपने 10 पृष्ठों के हलफनामे में कहा था कि यह मामला " एक वर्ष पहले ही वापस ले लिया जाना चाहिए था या फिर दायर ही नहीं किया जाना चाहिए था।"न्याय विभाग ने अदालत में कहा कि बाइडेन प्रशासन के दौरान दायर यह मामला सफल अभियोजन की वास्तविक संभावना के बिना केवल आरोप लगाने के उद्देश्य से सामने लाया गया था। विभाग का कहना था कि यह कथित रिश्वत भारतीय नागरिकों द्वारा भारतीय कंपनियों के माध्यम से भारतीय सरकारी अधिकारियों को दी गयी थी, जिसमें किसी अमेरिकी कंपनी, आपराधिक संगठन या राष्ट्रीय सुरक्षा हित का कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं था।

उल्लेखनीय है कि गौतम अडानी पर 2024 में आरोप लगाया गया था कि उन्होंने अपनी समूह की एक इकाई के लिए सौर ऊर्जा परियोजना की मंजूरी हासिल करने के उद्देश्य से भारतीय अधिकारियों को रिश्वत देने की साजिश रची और बाद में कंपनी की भ्रष्टाचार-रोधी नीतियों के संबंध में अमेरिकी निवेशकों को गुमराह किया। अडानी समूह ने इन सभी आरोपों से लगातार इनकार किया है। गौतम अडानी अब तक इन आरोपों के संबंध में अमेरिकी अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश नहीं हुए हैं।

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