चंडीगढ़ , अक्टूबर 31 -- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय मुख्यालय प्रभारी एवं सांसद तरुण चुघ ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय की ओर से महंगाई भत्ते (डीए) के बकाया भुगतान में देरी को लेकर राज्य सरकार को लगाई गई फटकार पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान पर निशाना साधा।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपने प्रचार पर भारी खर्च कर रही है, लेकिन कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को उनका जायज डीए देने में आनाकानी कर रही है।
श्री चुघ ने कहा कि यह शर्मनाक है कि पंजाब की सेवा में पूरा जीवन लगाने वाले कर्मचारियों को अपने ही अधिकारों का महंगाई भत्ता हासिल करने के लिए अदालतों का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है। उनके अनुसार, उच्च न्यायालय ने तीन अगस्त को केंद्र सरकार के अनुरूप लंबित डीए की सभी किस्तों का भुगतान दो सप्ताह के भीतर करने का निर्देश दिया था, लेकिन राज्य सरकार ने इसका पालन नहीं किया। उन्होंने कहा कि अदालत की यह टिप्पणी कि सरकार चांद या मंगल ग्रह पर अपने होर्डिंग लगा सकती है, लेकिन पहले अपनी वैधानिक जिम्मेदारियां पूरी करे, मान सरकार के लिए कड़ी फटकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विज्ञापनों और राजनीतिक प्रचार के जरिए अपनी छवि चमकाने में लगी है, जबकि कर्मचारियों के बकाया भुगतान की अनदेखी कर रही है।
भाजपा सांसद ने कहा कि सरकार ने उच्चतम न्यायालय में अपनी अपील की सुनवाई सुनिश्चित कराने के लिए जरूरी 520 रुपये की अदालत फीस तक जमा नहीं करवाई। उनके मुताबिक, उच्च न्यायालय को यह पूछना पड़ा कि क्या राज्य सरकार के पास इतनी राशि भी नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि अन्य मामलों में अपीलों को 24 घंटे में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कराने वाली सरकार डीए से जुड़े मामले में अपनी अपील की खामियां दूर कराने और सुनवाई सुनिश्चित करने में दो महीने से अधिक समय लगा चुकी है।
श्री चुघ ने कहा कि श्री मान और आम आदमी पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल की राजनीति विज्ञापनों और बड़े-बड़े दावों तक सीमित रह गई है। उन्होंने कहा कि महंगाई भत्ता कोई खैरात नहीं, बल्कि कर्मचारियों का वैधानिक अधिकार है और अदालत के आदेशों का पालन करना सरकार की संवैधानिक तथा प्रशासनिक जिम्मेदारी है। उन्होंने मांग की कि राज्य सरकार उच्च न्यायालय के आदेशों का तत्काल पालन करते हुए कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की लंबित डीए किस्तों का भुगतान करे। चुग ने कहा कि सरकारी खजाने का इस्तेमाल राजनीतिक प्रचार के बजाय पंजाब के लोगों और कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा के लिए किया जाना चाहिए।
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