चंडीगढ़ , जुलाई 03 -- शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के खिलाफ वायरल वीडियो मामले में सिख धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाते हुए उनके विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है।
इस संबंध में एसजीपीसी के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को पंजाब पुलिस के विशेष पुलिस महानिदेशक (स्पेशल डीजीपी) अमरबीर सिंह राय को लिखित शिकायत सौंपकर तत्काल कानूनी कार्रवाई की मांग की। एसजीपीसी की ओर से सौंपे गये शिकायत पत्र में आरोप लगाया गया है कि वायरल वीडियो में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान द्वारा दसों गुरु साहिबानों के प्रचलित स्वरूपों पर शराब छिड़कने तथा जरनैल सिंह खालसा भिंडरांवाले के स्वरूप के साथ कथित आपत्तिजनक हरकत किये जाने से दुनिया भर के सिखों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि इस मामले को दबाने के लिए मुख्यमंत्री ने अन्य अधिकारियों के साथ मिलकर कथित तौर पर फर्जी फोरेंसिक रिपोर्ट तैयार करवाने की साजिश रची। एसजीपीसी ने दावा किया कि इस संबंध में हरियाणा के गुरुग्राम स्थित डीएलएफ थाना में संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज हो चुकी है।
कमेटी ने मांग की है कि श्री मान के खिलाफ भारतीय कानून के तहत तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा दोषी पाए जाने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाये, ताकि सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं का सम्मान और कानून का शासन कायम रह सके।
पुलिस महानिदेशक कार्यालय के बाहर पत्रकारों से बातचीत करते हुए एसजीपीसी के मुख्य सचिव कुलवंत सिंह मन्नण ने बताया कि 27 जून 2026 को हुई शिरोमणि कमेटी की सामान्य सभा में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर अंतरिम समिति को इस मामले में कानूनी कार्रवाई करने का अधिकार दिया गया था। उसी प्रस्ताव के आधार पर यह शिकायत पंजाब के डीजीपी को सौंपी गयी है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री और राज्य सरकार ने कथित रूप से फर्जी रिपोर्ट तैयार करवाकर मामले को प्रभावित करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि यह दुनिया भर के सिखों की धार्मिक भावनाओं से जुड़ा गंभीर मामला है और इसमें कानून के अनुसार निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
प्रतिनिधिमंडल में एसजीपीसी के जूनियर उपाध्यक्ष बलदेव सिंह कल्याण, महासचिव शेर सिंह मंडवाला, मुख्य सचिव कुलवंत सिंह मन्नण, अंतरिम समिति के सदस्य सुरजीत सिंह गढ़ी, सुरजीत सिंह तुगलवाल, सुरजीत सिंह कंग, दलजीत सिंह भिंडर, बलदेव सिंह कायमपुर, मंगविंदर सिंह खापड़खेड़ी, अतिरिक्त सचिव लखबीर सिंह तथा कानूनी सलाहकार एडवोकेट अमनबीर सिंह सियाली सहित अन्य पदाधिकारी शामिल थे।
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