भोपाल , जून 18 -- मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है और राज्य सरकार आगामी मानसून सत्र में इससे संबंधित विधेयक विधानसभा में पेश कर सकती है।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार उच्चतम न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली सात सदस्यीय समिति ने प्रारंभिक मसौदा तैयार कर लिया है। समिति विभिन्न जिलों में संवाद कार्यक्रम आयोजित कर जनमत संग्रहित कर रही है तथा नागरिकों से ऑनलाइन सुझाव भी लिए जा रहे हैं।

प्रस्तावित यूसीसी का प्रारूप मुख्य रूप से विवाह, तलाक एवं भरण-पोषण, उत्तराधिकार एवं संपत्ति अधिकार तथा लिव-इन संबंधों से जुड़े प्रावधानों पर आधारित है। सरकार का उद्देश्य विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों के कारण उत्पन्न कानूनी जटिलताओं को समाप्त कर समान नागरिक व्यवस्था लागू करना बताया गया है।

मसौदे के अनुसार लिव-इन संबंधों के पंजीयन अथवा घोषणा को अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव है। ऐसे संबंधों में रहने वाली महिलाओं को पृथक्करण की स्थिति में भरण-पोषण का अधिकार प्रदान करने तथा उनसे जन्म लेने वाले बच्चों को माता-पिता की संपत्ति में वैधानिक उत्तराधिकार का अधिकार देने का प्रावधान भी शामिल किया गया है।

प्रस्तावित कानून में सभी समुदायों के लिए विवाह, तलाक, भरण-पोषण और संपत्ति संबंधी समान नियम लागू करने की बात कही गई है। साथ ही महिलाओं को संपत्ति एवं उत्तराधिकार के मामलों में समान अधिकार देने तथा तलाक की प्रक्रिया के अनिवार्य पंजीयन का प्रावधान भी प्रस्तावित है।

कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने प्रस्तावित व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा है कि लिव-इन संबंधों को समाज किस सीमा तक स्वीकार करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि आदिवासी समुदाय को कानून के दायरे से बाहर रखा जाता है तो इसे समान नागरिक संहिता कहना उचित नहीं होगा।

इस बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संकेत दिए हैं कि सरकार यूसीसी को लेकर गंभीर है। उन्होंने कहा कि आगामी मानसून सत्र में विभिन्न समसामयिक विषयों से जुड़े विधेयकों के साथ यूसीसी भी लाया जा सकता है और परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो इसे इसी सत्र में पारित कराया जा सकता है।

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