लखनऊ , जून 15 -- उत्तर प्रदेश के राहत आयुक्त एवं सचिव राजस्व डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने मानसून के आगमन से पूर्व संभावित बाढ़ प्रभावित संवेदनशील जिलो की तैयारियों और राहत-बचाव कार्यों की विस्तृत समीक्षा करते हुए जिलाधिकारियों को सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय रहते पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। सोमवार को लाल बहादुर शास्त्री भवन स्थित सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में राहत आयुक्त ने बाढ़ प्रभावित होने की आशंका वाले जनपदों के जिलाधिकारियों एवं अपर जिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि वे बाढ़ चौकियों और राहत शिविरों को पूरी तरह तैयार रखें तथा एसडीआरएफ और पीएसी की आवश्यकतानुसार तैनाती सुनिश्चित करें। उन्होंने स्थानीय गोताखोरों और नाविकों को भी सुरक्षा बलों के साथ तैनात करने के निर्देश दिए।
डॉ. यशोद ने कहा कि अतिसंवेदनशील और संवेदनशील क्षेत्रों का चिन्हांकन कर वहां बाढ़ बचाव से संबंधित सभी उपकरणों, नावों और राहत सामग्री की उपलब्धता समय से सुनिश्चित की जाए। उन्होंने आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए बाढ़ चौकियों, राहत शिविरों तथा स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित गोताखोरों और नाविकों की टीमों को सक्रिय रखने पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि बाढ़ से पूर्व सभी तैयारियां निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी कर ली जानी चाहिए, ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में प्रभावित लोगों तक तत्काल राहत पहुंचाई जा सके और जन-धन की हानि को न्यूनतम किया जा सके।
राहत आयुक्त ने कहा कि राहत शिविरों में महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की विशेष आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उनकी सुरक्षा और सुविधाओं के लिए विशेष प्रबंध किए जाएं। उन्होंने राहत शिविरों में चिकित्सकों की उपलब्धता, आवश्यक दवाओं के पर्याप्त भंडारण तथा आपात स्थिति से निपटने के लिए एम्बुलेंस की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित जनपदों में जनजीवन की सुरक्षा के लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए और बाढ़ प्रबंधन को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। उन्होंने राहत एवं बचाव कार्यों से संबंधित प्रक्रियाधीन निविदाओं को नियमानुसार शीघ्र पूर्ण कराने के निर्देश भी दिए।
डॉ. यशोद ने जिलाधिकारियों को अतिसंवेदनशील तटबंधों का नियमित निरीक्षण करने तथा आवश्यकतानुसार उनकी मरम्मत समय से पूरी कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बाढ़ की आशंका को देखते हुए सभी तटबंधों की सतत निगरानी की जाए तथा राज्य एवं जनपद स्तर पर स्थापित बाढ़ राहत नियंत्रण कक्ष चौबीसों घंटे सक्रिय रहें।
उन्होंने नदियों के किनारे बसे आवासीय क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश देते हुए कहा कि ऐसे क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों से जुड़े कार्मिकों की पर्याप्त तैनाती सुनिश्चित की जाए। साथ ही नियंत्रण कक्षों में पर्याप्त संख्या में कर्मियों की उपलब्धता बनाए रखी जाए, ताकि किसी भी आकस्मिक स्थिति में आमजन को तत्काल सहायता और उचित मार्गदर्शन प्रदान किया जा सके।
राहत आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि भारतीय मौसम विभाग तथा अन्य विश्वसनीय स्रोतों से प्राप्त मौसम संबंधी पूर्वानुमानों के आधार पर आमजन को समय-समय पर सचेत किया जाए और आवश्यक दिशा-निर्देशों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। उन्होंने कहा कि मौसम संबंधी चेतावनियों और सुरक्षा उपायों की जानकारी जनहित में जनसंचार माध्यमों तथा पब्लिक एड्रेस सिस्टम के जरिए लोगों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाई जाए।
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