कोलकाता , जून 16 -- दक्षिण-पश्चिम मानसून के पश्चिम बंगाल में दस्तक देने के मद्देनजर कई सरकारी एजेंसियां जल निकासी प्रणाली को मजबूत करने में सक्रिय हो गयी हैं।
सिंचाई विभाग, लोक निर्माण विभाग और स्थानीय नगर निकायों के अधिकारी नालों की सफाई, नहरों से गाद निकालने, पंपिंग स्टेशनों की मरम्मत और कमजोर तटबंधों को मजबूत करने के लिए 24 घंटे काम पर जुटे हुये हैं।
बुनियादी ढांचे के निरीक्षण के बाद अधिकारियों ने माना कि चुनौती बड़ी है, क्योंकि जो काम पिछले 10 वर्षों में होना चाहिए था, उसे अब मानसून से ठीक पहले महज दो हफ्तों के भीतर पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।
ग्रेटर कोलकाता और आसपास के महानगरीय क्षेत्रों में नगर निकाय नालों और गली-पिट्स को साफ करने के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं, जिसमें स्वचालित मशीनों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि, ड्रेनेज सिस्टम के सुचारू प्रवाह को बनाये रखने में प्लास्टिक कचरा आज भी सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है।
भारी बारिश के दौरान किसी भी तकनीकी खराबी से निपटने के लिए कई पंपिंग स्टेशनों पर पुराने उपकरणों को बदलकर अधिक क्षमता वाले नये पंप और बैकअप सिस्टम लगाये गये हैं। वर्तमान में कोलकाता और साल्ट लेक जैसे वीआईपी रोड से जुड़े प्रमुख इलाकों में 70 से अधिक मुख्य पंपों के साथ-साथ त्वरित तैनाती के लिए मोबाइल डीजल पंपों को भी अलर्ट पर रखा गया है।
शहरी विकास और नगर मामलों की मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने बेहाला, चौभागा, मिंट कॉलोनी, वीआईपी रोड और एयरपोर्ट के पास स्थित उन संवेदनशील 'ब्लैक स्पॉट' का दौरा किया, जहां हाल के वर्षों में बार-बार भारी जलभराव हुआ है।
सुश्री पॉल ने कहा कि जलभराव को न्यूनतम करने और बाढ़ जैसी स्थिति को रोकने के लिए मशीनरी और मानव श्रम दोनों को लगाया गया है। निरीक्षण के दौरान यह बात सामने आई कि कोलकाता हवाई अड्डे के आसपास से पानी निकालने वाली प्रमुख बागजोला और केस्टोपुर नहरों का सही तरीके से गाद नहीं निकाले जाने से उनकी गहराई बेहद कम बची है और लोगों ने नहर के बेड में कंक्रीट के खंभे धंसाकर अवैध निर्माण कर लिये हैं, जिससे उनकी प्राकृतिक ढलान प्रभावित हुई है।
कोलकाता के नियोजित शहरीकरण न्यू टाउन में भी न्यू टाउन कोलकाता विकास प्राधिकरण ने जल निकासी को बेहतर बनाने के प्रयास तेज कर दिये हैं। यहां सिटी सेंटर-2 से लेकर इको पार्क के पास राम मंदिर और प्रमुख आवासीय परिसरों तक फैली छोटी नहरों की सफाई की जा रही है तथा मानसून के दौरान पानी के विपरीत प्रवाह को रोकने के लिए बागजोला नहर के किनारे रेत की बोरियां तैयार रखी गयी हैं।
यह प्रशासनिक तैयारी केवल कोलकाता तक सीमित नहीं है। उत्तर बंगाल के पहाड़ी क्षेत्रों जैसे दार्जिलिंग, कालिम्पोंग, कर्सियांग और मिरिक में भी नागरिक निकायों को सतर्क कर दिया गया है और भूस्खलन व नदियों के उफान से निपटने के लिए विशेष आपदा प्रबंधन टीमों को तैयार रखा गया है।
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