सिडनी , मार्च 05 -- ऑस्ट्रेलियाई अध्ययन में दावा किया गया है कि मानव रक्त में कार्बन डाइऑक्साइड का बढ़ता स्तर पाया जा रहा है और यह चेतावनी भी दी गयी है कि एक प्रमुख रक्त मार्कर कुछ दशकों में अपनी स्वस्थ सीमा के अधिकतम स्तर तक पहुंच सकता है।

किड्स रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑस्ट्रेलिया (द किड्स) द्वारा बुधवार को जारी एक बयान में कहा गया कि ये निष्कर्ष विशेष रूप से बच्चों एवं किशोरों के लिए प्रासंगिक हैं, जिनके विकसित हो रहे शरीर को वायुमंडल में बढ़ते कार्बन डाईआक्साइड स्तर से सबसे लंबे समय तक संपर्क का सामना करना पड़ेगा।

इस संस्थान के शोधकर्ताओं ने ऑस्ट्रेलिया के कर्टिन विश्वविद्यालय और ऑस्ट्रेलियाई राष्ट्रीय विश्वविद्यालय के सहयोग से, दो दशकों से अधिक के अमेरिकी जनसंख्या आंकड़ों का विश्लेषण किया और पाया कि 1999 और 2020 के बीच 7,000 लोगों की रक्त प्रक्रिया में लगातार बदलाव हुए जो वायुमंडलीय कार्बन डाईआक्साइड में वृद्धि के साथ मेल खाते हैं।

एयर क्वालिटी, एटमॉस्फियर एंड हेल्थ में प्रकाशित अध्ययन में पाया गया कि कार्बन डाईआक्साइड से जुड़े रक्त मार्कर सीरम बाईकार्बोनेट का स्तर 1999 से लगभग सात प्रतिशत बढ़ा है। यह वायुमंडलीय र्काबन डाईआक्साइड में वृद्धि को दर्शाता है। इसके साथ ही कैल्शियम एवं फास्फोरस में गिरावट भी दर्ज की गयी है।

अध्ययन के प्रमुख लेखक और द किड्स के एसोसिएट प्रोफेसर अलेक्जेंडर लारकोम्बे ने कहा कि निष्कर्ष बताते हैं कि मानव शरीर पहले से ही बदलते वातावरण के लिए क्षतिपूर्ति कर रहा है जिसके संभावित रूप से दीर्घकालिक शारीरिक परिणाम हो सकते हैं।

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