नयी दिल्ली , मार्च 18 -- राजधानी स्थित इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर के सभागार में बुधवार को शॉर्ट फिल्म 'इफ्तार' का प्रीमियर हुआ। यह आयोजन विभिन्न धर्मों के बीच संवाद, करुणा और साझा मानवीय मूल्यों को दर्शाने वाला महत्वपूर्ण सांस्कृतिक अवसर साबित हुआ।
प्रख्यात फिल्मकार अरिंदम सिल निर्देशित इस लघु फिल्म की कहानी वरिष्ठ लेखक और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने लिखी है, जबकि इसका निर्माण सतनाम सिंह अहलूवालिया ने किया है।
'इफ्तार' अपने संवेदनशील कथानक से समाज में व्याप्त विविधताओं के बीच एकता, सह-अस्तित्व और पारस्परिक सम्मान के भाव को मजबूती से उभारती है।
इस विशेष अवसर पर सर्वधर्म सद्भाव की अनूठी झलक देखने को मिली। कार्यक्रम में ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन के मुख्य इमाम उमर अहमद इलियासी, दिल्ली गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के मुख्य सलाहकार परमजीत सिंह चंडोक, श्री लोकेश मुनि और श्री सुशील महाराज सहित विभिन्न धर्मों के 12 धर्मगुरु उपस्थित रहे। साथ ही कला, साहित्य, सिनेमा और सामाजिक जीवन से जुड़ी अनेक गणमान्य हस्तियों ने भी कार्यक्रम में शिरकत की।
फिल्म की स्क्रीनिंग के बाद आयोजित चर्चा सत्र में मुख्य इमाम उमर अहमद इलियासी ने कहा कि सबसे बड़ा धर्म इंसान और इंसानियत है और यही इस फिल्म का मूल है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इफ्तार केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि एक ऐसी इबादत है, जो हमें जोड़ती है और विभिन्न धर्मों के बीच एकता के भाव को सुदृढ़ करती है।
वहीं, फिल्म के लेखक डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने भावुक होते हुए कहा कि यह कहानी उनके लिए एक बेटी के समान है, जिसे नए रूप में खिलते देखना एक सुखद अनुभव है। उन्होंने कहा कि यदि यह फिल्म एक भी व्यक्ति के हृदय में सकारात्मकता जगा सके, तो वे इसे ऑस्कर अवॉर्ड जैसी बड़ी उपलब्धि मानेंगे। अन्य वक्ताओं ने भी इस फिल्म को आज के समय में सामाजिक जुड़ाव के लिए अत्यंत प्रासंगिक बताया।
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