भोपाल , मार्च 30 -- मध्यप्रदेश को नशामुक्त बनाने की दिशा में प्रदेश पुलिस 1 अप्रैल से मादक पदार्थों के विरुद्ध विशेष अभियान चलाएगी। पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने इस संबंध में सभी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं।
पुलिस मुख्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक में डीजीपी ने कहा कि ड्रग्स नेटवर्क के विरुद्ध केवल छोटे आरोपियों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके स्रोत, वितरण तंत्र और सरगनाओं तक पहुंचकर कठोर कार्रवाई की जाए। उन्होंने विशेष रूप से एमडी जैसे केमिकल ड्रग्स के विरुद्ध अभियान तेज करने के निर्देश दिए।
उन्होंने टेक्नोलॉजी के उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि ऑनलाइन माध्यमों से हो रही ड्रग्स सप्लाई पर रोक लगाने के लिए सभी जिलों में टेक्निकल सेल और साइबर सेल के बीच समन्वय बढ़ाया जाए। वीपीएन आधारित कॉल्स और डिजिटल नेटवर्क पर भी निगरानी रखने को कहा गया।
डीजीपी ने निर्देश दिए कि प्रत्येक जिले में नारको कोऑर्डिनेशन सेंटर की नियमित बैठकें आयोजित हों और अन्य विभागों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। अंतर्राज्यीय सीमाओं वाले जिलों को पड़ोसी राज्यों के साथ मिलकर संयुक्त कार्रवाई करने को कहा गया। उन्होंने नशे के विरुद्ध दो-सूत्रीय रणनीति-अपराधियों पर सख्त कार्रवाई और समाज में जागरूकता पर बल दिया। स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता अभियान चलाने तथा मुखबिर तंत्र को मजबूत करने के निर्देश भी दिए गए।
एनडीपीएस अधिनियम के तहत दर्ज मामलों में शीघ्र न्याय सुनिश्चित करने के लिए लंबित प्रकरणों के त्वरित निराकरण और फास्ट ट्रैक ट्रायल पर भी जोर दिया गया। डीजीपी ने सभी जिलों को 6 अप्रैल तक नारकोटिक्स नियंत्रण के लिए विस्तृत रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए हैं, जिसमें अपराधियों का डाटाबेस, हॉट-स्पॉट्स की पहचान और वित्तीय जांच शामिल होगी।
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