बैतूल , सितंबर 20 -- गणेशोत्सव केवल भगवान गणपति की आराधना और उत्सव का पर्व नहीं, बल्कि उनके जीवन से जुड़े आदर्शों को आत्मसात करने का अवसर भी है। भगवान गणेश बच्चों और युवाओं के लिए माता-पिता के प्रति श्रद्धा, निष्ठा, सेवा और आज्ञाकारिता के प्रेरणास्रोत हैं। यह बात हर्षा अग्रवाल ने गणेशोत्सव के अवसर पर कही।

उन्होंने कहा कि भाद्रपद मास में घर-घर विराजमान होने वाले भगवान गणेश विघ्नहर्ता और प्रथम पूजनीय देवता के रूप में श्रद्धा का केंद्र हैं। धार्मिक मान्यताओं में 'गणपति' का अर्थ गणों के स्वामी से है। भगवान गणेश का स्वरूप बुद्धिमत्ता, विवेक, कर्तव्यनिष्ठा और मातृ-पितृ भक्ति का संदेश देता है।

श्रीमती अग्रवाल ने कहा कि भगवान गणेश से जुड़े प्रसंगों में माता-पिता के प्रति उनके समर्पण का विशेष महत्व है। माता पार्वती की रक्षा के लिए उन्होंने अपने कर्तव्य का पालन किया और पिता भगवान शिव के साथ हुए प्रसंग में अपने प्राण तक न्योछावर कर दिए। बाद में भगवान शिव द्वारा प्रदान किए गए गजमुख स्वरूप को भी उन्होंने सहज भाव से स्वीकार किया। यह प्रसंग कर्तव्य और समर्पण की भावना को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय से जुड़े एक अन्य प्रसिद्ध प्रसंग में दोनों के समक्ष संसार की परिक्रमा करने की चुनौती रखी गई थी। भगवान गणेश ने अपनी बुद्धिमत्ता का परिचय देते हुए भगवान शिव और माता पार्वती की परिक्रमा की और उन्हें ही अपना संपूर्ण संसार बताया। इस प्रसंग के माध्यम से माता-पिता के महत्व और उनके प्रति सम्मान का संदेश मिलता है।

उन्होंने कहा कि भगवान गणेश का जीवन यह सीख देता है कि बुद्धिमत्ता केवल ज्ञान अर्जित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि सही परिस्थिति में विवेकपूर्ण निर्णय लेने में भी उसका महत्व है। माता-पिता का सम्मान, उनकी सेवा और उनके प्रति कर्तव्यबोध बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

श्रीमती अग्रवाल ने कहा कि गणेशोत्सव के दौरान बच्चों और युवाओं को भगवान गणेश के इन्हीं आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि संस्कार, विवेक और माता-पिता के प्रति सम्मान को जीवन का आधार बनाना ही गणेशोत्सव की सार्थक प्रेरणा हो सकती है।

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