भुवनेश्वर , अगस्त 29 -- ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने शनिवार को राज्य में स्मार्ट पुलिसिंग के लिए एक खाका पेश किया और पुलिस विभाग के लिए 10-सूत्री रोडमैप तैयार किया।

श्री माझी ने यहां राज्य पुलिस मुख्यालय में राज्यस्तरीय डीजीपी और आईजीपी सम्मेलन को संबोधित करते हुए ओडिशा में कानून व्यवस्था, आंतरिक सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और भविष्य की पुलिसिंग प्रणाली की समीक्षा की। उन्होंने नागरिक-अनुकूल पुलिसिंग, संगठित अपराध व महिलाओं के खिलाफ हिंसा के प्रति शून्य सहनशीलता और जबरन वसूली एवं अवैध नशीले पदार्थों के व्यापार पर नकेल कसने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार पुलिस सुधारों को लागू करने के लिए सभी आवश्यक संसाधन, कोष और प्रशासनिक सहायता प्रदान करेगी।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पुलिस अधीक्षकों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने राज्य भर में अपराध नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से 10 प्रमुख निर्देश जारी किये। प्रमुख क्षेत्रों में सजा की दर में सुधार करना, ओडिशा को नशा मुक्त बनाना, तटीय और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना, साइबर अपराध और डार्क वेब से खतरों का मुकाबला करना, खुफिया तंत्र को मजबूत करना, पुलिस स्टेशनों का आधुनिकीकरण करना, नागरिकों के प्रति विनम्र और संवेदनशील व्यवहार सुनिश्चित करना, जबरन वसूली को रोकना और भ्रष्टाचार मुक्त एवं समर्पित पुलिसिंग सुनिश्चित करना शामिल है।

श्री माझी ने नागरिक-अनुकूल पुलिसिंग को शीर्ष प्राथमिकता दी और कहा कि पुलिस स्टेशन आने वाले प्रत्येक शिकायतकर्ता को पीड़ित माना जाना चाहिए। उन्होंने पुलिसकर्मियों को शिकायतकर्ताओं से सहानुभूति, संवेदनशीलता और शिष्टाचार के साथ निपटने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि सरकार ने महिलाओं के खिलाफ हिंसा और संगठित अपराध के प्रति शून्य सहनशीलता की नीति अपनायी है।

मुख्यमंत्री ने एनसीआरबी के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि ओडिशा में सजा की दर में पहले के मुकाबले काफी सुधार हुआ है। अब यह 40 प्रतिशत से अधिक हो गयी है। उन्होंने इसे बढ़ाकर कम से कम 75 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा। श्री माझी ने पुलिस को जांच को अधिक पेशेवर और तकनीक-आधारित बनाने का निर्देश दिया।

श्री माझी ने त्योहारों के सीजन से पहले पुलिस को "दादा बाटी" (रंगदारी) और अवैध रूप से जबरन पैसे की वसूली में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

मुख्यमंत्री ने ओडिशा की 575 किलोमीटर लंबी तटरेखा को सुरक्षित करने और समुद्री मार्गों से घुसपैठ रोकने के उपायों की भी समीक्षा की। भुवनेश्वर में एक कमान और नियंत्रण केंद्र स्थापित किया गया है, जबकि 10 ड्रोन, पांच ट्रॉलर और 10 आधुनिक इंटरसेप्टर नौकाओं की खरीद की प्रक्रिया जारी है। हर तरह की जमीन पर चलने वाले वाहन (एटीवी) के माध्यम से समुद्र तट की गश्त को भी मजबूत किया गया है। समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष पुलिस अधिकारियों और पूर्व सैनिकों को तैनात किया गया है।

साइबर अपराध और वित्तीय धोखाधड़ी पर श्री माझी ने डार्क वेब की निगरानी के अलावा व्यापक जन जागरूकता अभियानों और उन्नत तकनीक के अधिक उपयोग का आह्वान किया। उन्होंने नेटग्रिड और सीसीटीएनएस के माध्यम से खुफिया तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि साइबर अपराध और डार्क-वेब गतिविधियों से निपटने के लिए आधुनिक डिजिटल निगरानी और जागरूकता कार्यक्रमों का उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि 50 करोड़ रुपये के विशेष जांच कोष के साथ पुलिस स्टेशनों के आधुनिकीकरण के लिए आवश्यक उपकरण प्रदान किये गये हैं।

इस अवसर पर मुख्य सचिव अनु गर्ग ने जनता को प्रदान की जाने वाली पुलिस सेवाओं की गुणवत्ता में और सुधार करने की आवश्यकता पर बल दिया।

पुलिस महानिदेशक बिनायतश मिश्रा ने मुख्यमंत्री को उनके सुझावों और निर्देशों के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए व्यापक उपाय किये जायेंगे। उन्होंने आश्वासन दिया कि अवैध नशीले पदार्थों के व्यापार के खिलाफ विशेष अभियानों को तेज किया जायेगा और असामाजिक गतिविधियों को रोकने के लिए संवेदनशील और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में पुलिस गश्त मजबूत की जायेगी।

सम्मेलन में गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव हेमंत शर्मा, खुफिया निदेशक व पुलिस महानिदेशक आर. पी. कोचे, पुलिस महानिदेशक (नक्सल विरोधी अभियान) संजीव पांडा तथा अन्य डीजीपी और आईजीपी उपस्थित थे।

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