भुवनेश्वर , सितंबर 19 -- ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने शनिवार को लोगों से राज्य के समुद्र तटों को स्वच्छ रखने और समुद्र को स्वस्थ बनाए रखने की अपील की, ताकि तटीय समुदायों की आजीविका, समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा की जा सके और समृद्ध 'ब्लू इकोनॉमी' का निर्माण हो।

अंतरराष्ट्रीय तटीय स्वच्छता दिवस के अवसर पर जारी अपने संदेश में श्री माझी ने कहा कि ओडिशा का समुद्र तट केवल रेत और समुद्र का विस्तार नहीं है, बल्कि यह राज्य की पहचान, विरासत और जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने कहा, "पुरी के पवित्र तटों से लेकर गोपालपुर तक, भीतरकणिका के मैंग्रोव से लेकर ओलिव रिडले कछुओं के प्रजनन स्थलों तक, हमारा तट उन कहानियों, परंपराओं और यादों को समेटे हुए है, जो पीढ़ियों से आगे बढ़ती रही हैं। ओडिशा में हमारे लिए समुद्र केवल समुद्र नहीं है, बल्कि हमारी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। भगवान जगन्नाथ की पवित्र भूमि के साक्षी महोदधि, प्रकृति, आस्था और हमारी जीवनशैली के साथ हमारे सदियों पुराने संबंध को दर्शाता है।"श्री माझी ने कहा कि ओडिशा के तट की कहानी यहां के लोगों की कहानी भी है। मछुआरों, नाविकों, किसानों, महिलाओं, युवाओं और अनगिनत परिवारों सहित तटीय समुदायों की कई पीढ़ियां महोदधि के साथ जीवन बिताती आयी हैं। उन्होंने कहा, "इसलिए अपने तट की रक्षा करना केवल समुद्र किनारों को संरक्षित करना नहीं है, बल्कि आजीविका, समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र और हमारी ब्लू इकोनॉमी के भविष्य की रक्षा करना है।"मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जनभागीदारी के माध्यम से स्वच्छ और टिकाऊ भारत के दृष्टिकोण से पर्यावरण संरक्षण के सामूहिक प्रयासों को नयी गति मिली है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के नेतृत्व में चलाया जा रहा "स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर" अभियान नागरिकों, युवाओं और तटीय समुदायों को एकजुट कर इस दृष्टिकोण को आगे बढ़ा रहा है तथा समुद्र तटों और महासागरों की सुरक्षा के प्रयास कर रहा है।

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