भिवानी , मई 17 -- हरियाणा में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की भिवानी जिला समिति ने केंद्र सरकार से पेट्रोल, डीजल और सीएनजी के बढ़े हुए दाम को वापस लेने की मांग की है।

पार्टी जिला सचिव कामरेड ओमप्रकाश ने बताया कि पहले से ही महंगाई, बेरोजगारी, स्थिर वेतन और बढ़ते आर्थिक संकट से जूझ रहे काम करने वाले लोगों पर पेट्रोल और डीजल में तीन-तीन रुपये प्रति लीटर और सीएनजी में दो प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी से और बोझ पड़ेगा। इससे चौतरफा महंगाई बढ़ेगी, जिसका कुप्रभाव गरीब व्यक्ति पर सबसे ज्यादा होगा। उन्होंने कहा कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों का यह कहना कि वैश्विक कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों की वजह से उन्हें अंडर-रिकवरी का सामना करना पड़ रहा है, मंज़ूर नहीं है और गुमराह करने वाला है। इन्हीं तेल कंपनियों ने पिछले कई सालों में जब वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें दबी या कम रहीं, तब भी भारी मुनाफा कमाया। अंडर-रिकवरी शब्द अपने आप में एक गलत नाम है। यह तेल विपणन कंपनियों को हुए असली नुकसान को नहीं दिखाता है, बल्कि यह मौजूदा राजस्व और अगर ईंधन की कीमतें और बढऩे दी जातीं तो उन्हें मिलने वाले बड़े मुनाफे के बीच एक काल्पनिक कमी को बताता है।

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने लोगों को फायदा देने से मना करके भी बहुत ज्यादा राजस्व कमाया। आज जब अंतरराष्ट्रीय कीमतें ऊपर-नीचे होती है तो बोझ तुरंत आम लोगों के कंधों पर डालने की कोशिश की जाती है। परिवहन की लागत पर बुरा असर डालने के अलावा, इनका पूरी अर्थव्यवस्था पर एक जैसा असर पड़ना तय है, जिसमें जरूरी चीजों, खेती के लागत और आधारभूत सेवाओं की बढ़ती कीमतें शामिल हैं, लेकिन यह इन्हीं तक सीमित नहीं है। सीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर ऑटो चालकों, परिवहन श्रमिकों और सस्ते पब्लिक और साझा परिवहन पर निर्भर लाखों लोगों पर पड़ता है। यह बताना ज़रूरी है कि सरकार द्वारा चुनावी फायदे के लिए इस घोषणा में देरी की गई है। सीपीआई(एम) पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी को तुरंत वापस लेने की मांग करती है।

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