अगरतला , फरवरी 21 -- त्रिपुरा के नेता प्रतिपक्ष एवं माकपा नेता जितेंद्र चौधरी ने शनिवार को केंद्र सरकार पर 'भाषाई प्रभुत्व' को बढ़ावा देने के लिए तीखी आलोचना की।

उनका यह आरोप गृह मंत्री अमित शाह के राज्य के दौरे के दौरान 'पूर्वी, उत्तर-पूर्वी और उत्तर क्षेत्रीय राजभाषा सम्मेलन' में दिये गये बयान के बाद आया है।

श्री चौधरी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के प्रदेश सचिव भी हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि राजभाषा विभाग हालांकि हिंदी को आगे बढ़ाने के लिए उत्तरदायी है और इस संबंध में उसकी भूमिका पर कोई सवाल नहीं है, लेकिन पूर्वोत्तर की भाषाओं को देवनागरी लिपि अपनाने का आग्रह करने वाला कोई भी सुझाव अस्वीकार्य है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह की धारणा क्षेत्र की सांस्कृतिक और भाषाई पहचान को कमजोर करती है। एक पूर्व सांसद और राजभाषा पर संसदीय समिति के सदस्य के रूप में अपने कार्यकाल को याद करते हुए श्री चौधरी ने कहा कि हालांकि भाषाओं के प्रचार-प्रसार पर चर्चा करना सही है, लेकिन उनके विकास को किसी विशेष लिपि के इस्तेमाल से जोड़ना चिंताजनक संकेत है।

उन्होंने उल्लेख किया कि पूर्वोत्तर क्षेत्र लगभग 40 स्वदेशी भाषाओं का घर है। इनमें से प्रत्येक का अपना अनूठा इतिहास और सांस्कृतिक महत्व है। उन्होंने कहा कि किसी भाषा के विकास या आधिकारिक मान्यता को देवनागरी के साथ जोड़ना इस समृद्ध विविधता की अनदेखी करना है।

श्री चौधरी ने आगे तर्क दिया कि इस तरह के प्रस्ताव राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के वैचारिक रुख के अनुरूप हैं। उन्होंने जोर दिया कि भाषा और लिपि के बारे में निर्णय लेने का अधिकार पूरी तरह से संबंधित समुदायों के पास होना चाहिए।

त्रिपुरा की एक जनजातीय भाषा 'कॉकबोरोक' को रोमन लिपि में अपनाया जाये या देवनागरी में इस पर चल रही बहस के संबंध में श्री शाह की टिप्पणियों का हवाला देते हुए उन्होंने देवनागरी लिपि का समर्थन करने के लिए केंद्र सरकार की आलोचना की।

अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर श्री चौधरी ने इस बात की पुष्टि की कि लोगों को अपनी पसंद की लिपियों का उपयोग कर अपनी मातृभाषाओं को संरक्षित करने और बढ़ावा देने का अधिकार होना चाहिए। उन्होंने भाषा को निजी पहचान का अहम हिस्सा बताया और चेतावनी दी कि किसी विशिष्ट लिपि को थोपने के किसी भी प्रयास का विरोध किया जायेगा, चाहे वह खुले तौर पर हो हो या चुपके से। उन्होंने भाजपा पर एक तरह के 'भाषाई साम्राज्यवाद' में शामिल होने का आरोप लगाया, जिसका उद्देश्य छोटे समुदायों की पहचान को कमजोर करना है।

श्री चौधरी की टिप्पणियों का जवाब देते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद राजीव भट्टाचार्य ने हिंदी को भारत की राष्ट्रीय भाषा के रूप में बढ़ावा देने का बचाव किया और कहा कि इसकी मान्यता का उद्देश्य राष्ट्रीय एकीकरण को प्रोत्साहित करना है।

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