भिवानी , सितंबर 05 -- मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की जिला कमेटी भिवानी ने प्रदेश के अतिथि अध्यापकों के नियमितीकरण की मांग को लेकर चलाए जा रहे आंदोलन का समर्थन किया है।
माकपा ने कहा कि वर्षों से सरकारी स्कूलों में पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी से सेवाएं दे रहे अतिथि अध्यापकों को अस्थायी व्यवस्था में बनाए रखना अन्याय है। सरकार को उनकी नियमितीकरण की मांग तत्काल स्वीकार कर ठोस प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए।
माकपा जिला सचिव कामरेड ओमप्रकाश ने कहा कि अतिथि अध्यापकों ने अपने अनुभव और मेहनत से प्रदेश की सरकारी शिक्षा व्यवस्था को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके बावजूद उन्हें बार-बार आश्वासन दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब सरकार लगातार उनकी सेवाओं का लाभ ले रही है तो उन्हें स्थायी रोजगार और समान सेवा सुरक्षा देने से पीछे क्यों हट रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार को अब आश्वासनों से आगे बढ़कर नियमितीकरण का स्पष्ट रोडमैप घोषित करना चाहिए। अतिथि अध्यापक लंबे समय से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। जुलाई-अगस्त में कुरुक्षेत्र में उनका अनिश्चितकालीन धरना चला, जबकि 23 अगस्त को पानीपत में भी प्रदर्शन किया गया।
माकपा ने कहा कि सरकार को शिक्षा के निजीकरण, ठेका प्रथा और अस्थायी नियुक्तियों को बढ़ावा देने के बजाय सरकारी स्कूलों में पर्याप्त संख्या में स्थायी शिक्षकों की भर्ती करनी चाहिए। वर्षों से सेवाएं दे रहे इन अध्यापकों को पक्का रोजगार देना उनके भविष्य की सुरक्षा के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण सरकारी शिक्षा व्यवस्था के लिए भी जरूरी है।
श्री ओमप्रकाश ने आरोप लगाया कि 2014 के विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा नेताओं ने अतिथि अध्यापकों के धरने में पहुंचकर सरकार बनने पर उन्हें पक्का करने का वादा किया था। इनमें तत्कालीन शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि हरियाणा में तीन बार सत्ता में आने के बावजूद भाजपा ने अपना वादा पूरा नहीं किया, जो उसके दोहरे रवैये को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि माकपा अतिथि अध्यापकों के संघर्ष के साथ मजबूती से खड़ी है और उनकी मांगों के समर्थन में हर स्तर पर सहयोग एवं संघर्ष करेगी।
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