बीजापुर , अक्टूबर 07 -- छत्तीसगढ़ में बीजापुर जिले के आवापल्ली थाना क्षेत्र के मुरदंडा गांव में सरपंच, उपसरपंच और एक ग्रामीण के नाम से धमकीपूर्ण पर्चे फेंकने के मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

पुलिस का दावा है कि जमीन विवाद के चलते माओवाद की आड़ में भय का माहौल बनाने के उद्देश्य से ये पर्चे फेंके गए थे।

पुलिस के अनुसार ग्राम पंचायत मुरदंडा के सरपंच नारायण काका बुधवार सुबह करीब सात बजे अपने घर से कमारगुड़ा की ओर जा रहे थे। इसी दौरान घर के पास रास्ते में उन्हें धमकीपूर्ण पर्चे मिले। इनमें सरपंच नारायण काका, उपसरपंच नारायण कचलम और ग्रामीण जयमूर्ति चापड़ी को स्कूल निर्माण सहित अन्य कार्यों को लेकर धमकी दी गई थी। सूचना मिलने पर पुलिस ने क्षेत्र से कुल सात पर्चे बरामद किए।

सरपंच की रिपोर्ट पर आवापल्ली थाने में अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। पुलिस अधीक्षक उमेश प्रसाद गुप्ता के मार्गदर्शन में की गई जांच के दौरान पुलिस को मामले के पीछे जमीन विवाद की जानकारी मिली।

पुलिस के मुताबिक मुरदंडा-बायेगुड़ा निवासी संदीप मड़कम का संबंधित भूमि को लेकर विवाद था। वह करीब पांच वर्षों से जमीन पर कथित रूप से अवैध कब्जा किए हुए था। जून 2026 में तहसीलदार द्वारा भूमि का सीमांकन किए जाने के बाद वहां स्कूल भवन निर्माण की प्रक्रिया शुरू हुई और कब्जा हटाया गया था।

पुलिस का आरोप है कि इसी विवाद के चलते संदीप मड़कम ने नागेश बोड़के के साथ मिलकर माओवाद की आड़ में लोगों के बीच भय पैदा करने के उद्देश्य से धमकीपूर्ण पर्चे तैयार किए और उन्हें मुरदंडा से कमारगुड़ा जाने वाले रास्ते पर फेंक दिया।

पुलिस ने बताया कि पूछताछ और जांच में मिले साक्ष्यों के आधार पर संदीप मड़कम और नागेश बोड़के को गिरफ्तार किया गया। दोनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और छत्तीसगढ़ जनसुरक्षा अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। मामले की आगे जांच जारी है।

बीजापुर पुलिस ने नागरिकों से धमकी भरे पर्चे अथवा संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिलने पर अफवाहों पर विश्वास नहीं करने और तत्काल नजदीकी थाने को सूचना देने की अपील की है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित