बड़वानी , जून 10 -- मध्यप्रदेश के बड़वानी जिले के राजपुर वन परिक्षेत्र के गोलाटा गांव में वन विभाग एक मादा तेंदुआ शावक को उसकी मां से मिलाने के लिए विशेष अभियान चला रहा है।

वन विभाग के अनुसार करीब दो माह की मादा तेंदुआ शावक सोमवार को गांव के एक खेत में अत्यंत कमजोर अवस्था में मिली थी। वह ठीक से चलने में भी असमर्थ थी। ग्रामीणों से सूचना मिलने पर वन विभाग और वन्यजीव बचाव दल मौके पर पहुंचा।

अधिकारियों ने प्रारंभ में मां तेंदुआ के लौटने की संभावना को देखते हुए इंतजार किया, लेकिन शावक की हालत बिगड़ती देख उसे उपचार के लिए वन विभाग के इको सेंटर ले जाया गया। जांच में शावक के डिहाइड्रेशन तथा कई दिनों से भोजन और पानी नहीं मिलने के कारण कमजोर होने की पुष्टि हुई। उपचार और ड्रिप देने के बाद उसकी स्थिति में सुधार आया।

वनमंडलाधिकारी आशीष बंसोड़ ने बताया कि शावक का प्राकृतिक विकास उसकी मां के संरक्षण में ही बेहतर ढंग से संभव है, इसलिए उसे मां से मिलाने का प्रयास किया जा रहा है। स्थानीय किसानों ने भी क्षेत्र में पिछले लगभग एक माह से एक मादा तेंदुआ को अपने तीन शावकों के साथ देखे जाने की जानकारी दी है।

वन विभाग प्रतिदिन सूर्यास्त के बाद शावक को उसी स्थान के समीप एक विशेष पिंजरे में रखता है, जहां वह मिली थी। पिंजरे के आसपास तीन नाइट विजन कैमरे लगाए गए हैं, जबकि वनकर्मी थर्मल विजन उपकरणों के साथ पूरी रात निगरानी कर रहे हैं। मां तेंदुआ के आने के संकेत मिलने पर पिंजरे का दरवाजा दूर से रस्सी के माध्यम से खोला जाएगा, ताकि दोनों का प्राकृतिक रूप से पुनर्मिलन हो सके।

वन अधिकारियों ने बताया कि मादा तेंदुआ सामान्यतः अपने शावकों को सुरक्षित स्थान पर छोड़कर भोजन की तलाश में जाती हैं और बाद में लौट आती हैं। इसी व्यवहार को ध्यान में रखकर यह अभियान संचालित किया जा रहा है।

पहली रात मां तेंदुआ नहीं लौटी, लेकिन वन विभाग ने प्रयास जारी रखे हैं। अगले चार से पांच दिनों तक यही प्रक्रिया दोहराई जाएगी। दिन में शावक का उपचार किया जाएगा और रात में उसे पुनः उसी स्थान पर रखा जाएगा।

अधिकारियों ने कहा कि यदि सभी प्रयासों के बावजूद मां तेंदुआ नहीं लौटती है तो शावक को दीर्घकालिक देखभाल के लिए किसी मान्यता प्राप्त प्राणी उद्यान अथवा वन्यजीव बचाव केंद्र भेजा जाएगा।

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