बैतूल , सितंबर 14 -- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले की चिचोली तहसील के गोधना गांव में स्थित मां चंडी दरबार को लेकर विवाद गहरा गया है। सोमवार को जिलेभर से आदिवासी समाज और विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग मंदिर परिसर पहुंचे और पुराने मंदिर के ढांचे को तोड़े जाने तथा मंदिर संचालन की व्यवस्था में बदलाव के विरोध में प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान गर्भगृह के स्थान पर बलि देकर भी विरोध दर्ज कराया गया।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मां चंडी दरबार केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की सदियों पुरानी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ा आस्था केंद्र है। समाज के लोगों के अनुसार गोंडवाना काल से इस स्थान का धार्मिक महत्व रहा है। प्रत्येक रविवार और बुधवार को यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और पारंपरिक तरीके से पूजा-अर्चना करते हैं।
आदिवासी समाज का आरोप है कि करीब तीन वर्ष पहले मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के एक फैसले के बाद मंदिर के संचालन और व्यवस्थाओं में बदलाव आया। इसके बाद पुराने मंदिर के ढांचे को हटाए जाने से विवाद और गहरा गया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पुराने मंदिर की जगह अब भव्य मंदिर के निर्माण की प्रक्रिया चल रही है, जिसका वे विरोध कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार जिस जमीन पर मंदिर स्थित है, वह राजस्व रिकॉर्ड में यादव परिवार की निजी भूमि के रूप में दर्ज है। मंदिर और भूमि से जुड़े विवाद में हाईकोर्ट का फैसला भी इसी परिवार के पक्ष में आया था। हालांकि आदिवासी समाज का कहना है कि जमीन के स्वामित्व का प्रश्न अलग है और मंदिर से जुड़ी पारंपरिक धार्मिक व्यवस्थाओं तथा सामुदायिक आस्था को इससे अलग देखा जाना चाहिए।
आदिवासी नेता राजा धुर्वे, जितेंद्र सिंह इवने और जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस) से जुड़े कार्यकर्ताओं ने कहा कि हाईकोर्ट में चली कानूनी लड़ाई में आदिवासी समाज पक्षकार नहीं था। उनका कहना है कि मंदिर से जुड़ी पारंपरिक पूजा-पद्धति और सांस्कृतिक अधिकारों पर भी विचार किया जाना चाहिए।
समाज के प्रतिनिधियों ने पेसा कानून और वनाधिकार कानून का हवाला देते हुए मंदिर की व्यवस्थाओं और प्रबंधन में ग्राम सभा की भूमिका तय करने की मांग की है। उनका कहना है कि धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व वाले इस स्थान की परंपराओं को किसी भी निर्माण या प्रशासनिक बदलाव के कारण समाप्त नहीं किया जाना चाहिए।
जयस और आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने 11 सितंबर को पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर मंदिर की सुरक्षा सुनिश्चित करने, पुराने मंदिर को नुकसान पहुंचाए जाने की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की मांग की थी। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि मंदिर के ऐतिहासिक और सार्वजनिक धार्मिक महत्व से जुड़े जरूरी तथ्यों को पूर्व की कानूनी प्रक्रिया में उचित तरीके से सामने नहीं रखा गया।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे मंदिर संरक्षण और धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं की रक्षा की मांग को लेकर शांतिपूर्ण एवं संवैधानिक तरीके से आंदोलन जारी रखेंगे। मंदिर को लेकर बढ़ते विवाद के बीच प्रशासन की ओर से फिलहाल कोई स्पष्ट सार्वजनिक पक्ष सामने नहीं आया है।
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