बेंगलुरु , अगस्त 25 -- कर्नाटक के मांड्या जिले में मंगलवार को किसानों और कन्नड़ समर्थक संगठनों ने कृष्णा राजा सागर (केआरएस) बांध से तमिलनाडु के लिए कावेरी नदी का पानी छोड़े जाने के विरोध में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किए।
किसानों और कन्नड़ समर्थक संगठनों ने कावेरी जल विनियमन समिति (सीडब्ल्यूआरसी) की उस सिफारिश के खिलाफ अपना विरोध तेज कर दिया, जिसमें तमिलनाडु के लिए 15 दिनों तक रोजाना 9,000 क्यूसेक कावेरी का पानी छोड़ने की बात कही गई थी।
मांड्या रक्षण वेदिका और अन्य कन्नड़ संगठनों के सदस्यों ने श्रीरंगपट्टनम में कावेरी नदी में उतरकर विरोध-प्रदर्शन करते हुए राज्य सरकार से तमिलनाडु को पानी नहीं देने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि कर्नाटक खुद पानी के अभाव का सामना कर रहा है और किसान सिंचाई और पीने के पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने सरकार पर राज्य के हितों की रक्षा करने में विफल रहने का आरोप लगाया और किसानों की दुर्दशा को उजागर करने के लिए नदी के किनारे पेट पर गीला कपड़ा बांधकर अनोखे ढंग से विरोध-प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि सरकार प्रभावित इलाकों को सूखाग्रस्त घोषित करे और फसल का नुकसान झेलने वाले किसानों के लिए 15,000 रुपये प्रति एकड़ मुआवजे का ऐलान करे।
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