महोबा , अक्टूबर 13 -- उत्तर प्रदेश मे बुंदेलखंड की वीरभूमि महोबा में मां चंडिका देवी का प्राचीन मंदिर में नवरात्र के मौके पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा है।
महोबा के चंडिका देवी मंदिर से जुड़ी मान्यता के अनुसार, मां की पाषाण प्रतिमा दिन के अलग-अलग समय पर विभिन्न भावों में दिखाई देती है। भक्तों का विश्वास है कि सुबह माता की मुखमुद्रा बाल स्वरूप जैसी प्रसन्न और हंसमुख नजर आती है, जबकि दोपहर में उनका स्वरूप ओजस्वी एवं उग्र दिखाई देता है। शाम के समय माता की मुद्रा सौम्य और शांत प्रतीत होने की बात कही जाती है। इन्हीं मान्यताओं के चलते श्रद्धालु दिन में कई बार मंदिर पहुंचकर माता के दर्शन करते हैं। हालांकि, प्रतिमा के दिनभर में 16 कलाएं बदलने की बात धार्मिक लोकविश्वास का हिस्सा है, जिसका वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित होना अलग विषय है।
नगर के दक्षिण पश्चिम छोर पर कानपुर - सागर राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित मां चंडिका देवी का मंदिर वीर आल्हा और ऊदल की गाथाओं से भी जुड़ा हुआ है। बुंदेली लोककथाओं और जनश्रुतियों के अनुसार, महोबा के इन महान योद्धाओं की मां चंडिका आराध्य देवी और कुलदेवी थीं। मान्यता है कि युद्ध में जाने से पहले आल्हा-ऊदल माता का आशीर्वाद प्राप्त करते थे। यही कारण है कि मंदिर बुंदेलखंड की वीरता, शौर्य और धार्मिक आस्था का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है। इसके साथ ही महोबा का चंडिका देवी मंदिर क्षेत्र की प्राचीन धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का भी अहम हिस्सा है।
मंदिर में स्थापित लगभग 22 फ़ीट क़ी विशाल पाषाण प्रतिमा अपनी भव्यता और शिल्प के लिए प्रसिद्ध है। स्थानीय परंपराओं में इस मंदिर को चंदेलकालीन इतिहास से जोड़कर देखा जाता है। माता की विशाल प्रतिमा और मंदिर की प्राचीनता क्षेत्र के गौरवशाली अतीत की याद दिलाती है।
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