लखनऊ , जून 16 -- वर्ष 2014 में केंद्र में मोदी सरकार और 2017 में उत्तर प्रदेश में योगी सरकार बनने के बाद प्रदेश में महिला सशक्तीकरण की दिशा में अभूतपूर्व बदलाव आया है।

अधिकारियों का दावा है कि केंद्र और राज्य सरकार की समन्वित नीतियों से उत्तर प्रदेश आज 'सुरक्षित बेटी, सशक्त महिला एवं आर्थिक सशक्तीकरण' का मॉडल बनकर उभरा है।

योगी सरकार ने सत्ता संभालते ही महिला सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। एंटी रोमियो स्क्वॉड का गठन, 1090 महिला हेल्पलाइन को सशक्त करना, हर थाने में महिला हेल्प डेस्क और 'मिशन शक्ति' अभियान ने माहौल बदला।

पुलिस भर्ती में महिलाओं को 20 प्रतिशत आरक्षण देने का असर यह हुआ कि 2017 तक जहां महिला पुलिसकर्मियों की संख्या करीब 10 हजार थी, वह अब बढ़कर 44 हजार से अधिक हो गई है। जिलों में महिला बीट पुलिसिंग, पिंक पेट्रोलिंग जैसी व्यवस्थाओं से महिलाओं में सुरक्षा का भरोसा बढ़ा है।

'प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना' का सबसे बड़ा लाभार्थी राज्य उत्तर प्रदेश रहा। यहां 1.86 करोड़ परिवारों को मुफ्त गैस कनेक्शन मिले। लकड़ी-उपलों से खाना बनाने वाली ग्रामीण महिलाओं को आंख और फेफड़ों की बीमारियों से राहत मिली। समय और श्रम की बचत से महिलाएं अब अन्य आर्थिक गतिविधियों से जुड़ रही हैं।

'मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना' के तहत अब तक 27.37 लाख से अधिक बालिकाओं को लाभ मिला है। जन्म से लेकर शिक्षा तक विभिन्न चरणों में कुल 25 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। योजना का मकसद कन्या भ्रूण हत्या रोकना और बेटियों को बोझ नहीं, शक्ति के रूप में स्थापित करना है।

प्रदेश में करीब 1 करोड़ महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं। डेयरी, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प और सिलाई-कढ़ाई जैसे कामों से महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं। 'लखपति दीदी' अभियान को मिशन मोड में लागू कर योगी सरकार ने अब तक 18.55 लाख महिलाओं को लखपति बनाया है। कौशल विकास, प्रशिक्षण और वित्तीय मदद से महिलाएं अब रोजगार देने वाली शक्ति बन रही हैं।

'मिशन शक्ति' केवल योजना नहीं, सामाजिक परिवर्तन का अभियान बन चुका है। स्कूल-कॉलेज से लेकर पंचायतों तक महिलाओं को उनके अधिकारों और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। इससे महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा है और वे अपने हक के प्रति सजग हुई हैं।

एनसीआरबी के आंकड़े बताते हैं कि 2017 से पहले की तुलना में महिला अपराधों में कमी आई है। 2016 में दहेज हत्या की दर 2.4 थी, जो 2024 में घटकर 1.8 रह गई। अपहरण के मामले 13,014 से घटकर 7,919 हुए और रेप की दर 4.6 से घटकर 2.8 रह गई।

पिछले नौ साल में सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के इस मॉडल ने यूपी की महिलाओं को विकास यात्रा की सहभागी ही नहीं, अग्रणी शक्ति बना दिया है। आज उत्तर प्रदेश की नारी शक्ति केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि प्रदेश के विकास की धुरी बनकर उभर रही है।

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