पटना , मई 06 -- बिहार की ग्रामीण महिलाएं 'शक्ति धारा' और 'शक्ति बाजार' जैसी पहल के जरिए पारंपरिक सीमाओं को तोड़कर डिजिटल और वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना रही हैं।

बिहार में महिला उद्यमिता तेजी से बढ़ रही है। छोटे स्तर पर काम कर रही उद्यमियों को व्यवसाय, तकनीक, ब्रांडिंग इत्यादि की समझ से सीमित बाजार की जगह अब वैश्विक मंच मिलने लगा है। प्रशिक्षण, तकनीक और सही मार्गदर्शन के सहारे ये महिलाएं न सिर्फ आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति दे रही हैं।

पंचायती राज विभाग और निजी संस्था सेंटर फॉर कैटलाइजिंग चेंज (सी 3) की छोटी लेकिन महत्वपूर्ण कोशिशों की बदौलत यह काम सफल हो पाया है। पिछले वर्ष से महिला जनप्रतिनिधियों को 'शक्ति धारा' कार्यक्रम के तहत विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे वे अपने पंचायत में मौजूद स्थानीय महिला उद्यमियों को वैश्विक बाजार में पहचान बनाने का मौका दे रहीं हैं। मुजफ्फरपुर, रोहतास और नालंदा जिले में से कुल 132 महिला जनप्रतिनिधियों को इससे जोड़कर विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया।

शक्ति धारा के तहत शक्ति बाजार का भी आयोजन किया गया है। इसमें महिलाओं के लिए संरचित बाजार, डिजिटल कौशल, वित्तीय जानकारी और नेतृत्व समर्थन मिल रहा है। पिछले वर्ष मुजफ्फरपुर में जिला स्तरीय कार्यक्रम में तीन महिलाओं ने मिलकर पांच लाख रुपये से अधिक के लोकल उत्पादों की रिकॉर्ड बिक्री की थी। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम महिलाओं में तकनीकी समझ उत्पन्न कर रहे है। इसके सकारत्मक परिणाम से ग्रामीण कलाओं को वैश्विक पहचान मिली, उत्पादों की रेंज बढ़ी, कारोबार विस्तार से नए ग्रामीण रोजगार सृजित हुए और नवाचार से बाजार सज रहा है।

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