बेंगलुरु , अप्रैल 19 -- कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने रविवार को भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर महिला आरक्षण लागू करने के नाम पर दक्षिण भारत पर 'राजनीतिक सर्जिकल स्ट्राइक' की साजिश रचने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि इस कदम का उद्देश्य दक्षिणी राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को कमजोर करना है।

यहां जारी एक बयान में श्री शिवकुमार ने कहा कि महिला आरक्षण को चुनाव क्षेत्रों के परिसीमन से जोड़ने की शर्त 'बेहद खतरनाक' है। उन्होंने इसे कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल जैसे उन राज्यों को नुकसान पहुंचाने की 'साजिश' बताया, जिन्होंने जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण पाया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि जहां दक्षिणी राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण उपायों के माध्यम से राष्ट्रीय विकास में योगदान दिया है, वहीं केंद्र अब अधिक जनसंख्या वाले राज्यों के लिए संसदीय प्रतिनिधित्व बढ़ाने की योजना बना रहा है, जिससे प्रगतिशील राज्यों की हिस्सेदारी कम हो जायेगी।

इस कदम को 'दक्षिण की आवाज की राजनीतिक नोटबंदी' करार देते हुए राज्य कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि महिला सशक्तीकरण के मुखौटे में लाया गया यह प्रस्ताव वास्तव में संघीय संतुलन को बदलने का एक प्रयास है।

श्री शिवकुमार ने महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने की जरूरत पर सवाल उठाया और पूछा कि मौजूदा 543 लोकसभा क्षेत्रों के भीतर ही इसे क्यों नहीं लागू किया जा सकता? उन्होंने केंद्र से यह कानूनी आश्वासन भी मांगा कि परिसीमन के बाद दक्षिणी राज्य अपनी संसदीय सीटें नहीं खोयेंगे।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी महिला आरक्षण का समर्थन करती है, लेकिन इसका उपयोग क्षेत्रीय असंतुलन पैदा करने के लिए किये जाने वाले किसी भी प्रयास का कड़ा विरोध करेगी। उन्होंने कहा, "महिला आरक्षण को महिलाओं का अधिकार बने रहना चाहिए, न कि इस विधेयक को दक्षिण भारत को दबाने का हथियार बनाया जाये।"विपक्ष को आगाह करते हुए उन्होंने कहा कि दक्षिणी राज्यों की राजनीतिक आवाज को कमजोर करने वाले किसी भी कदम का विरोध किया जायेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनके हितों के साथ समझौता किया गया तो जनता 'करारा जवाब देगी'।

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