बेंगलुरु , अप्रैल 18 -- कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने कहा कि महिला आरक्षण को लेकर कोई विरोध नहीं है और संविधान (131वां संशोधन) विधेयक के विफल होने के पीछे केंद्र की राजनीतिक रणनीति जिम्मेदार है।
उन्होंने कहा, "महिला आरक्षण विधेयक 2023 में लोकसभा से पहले ही पारित हो चुका था। यह इसलिए विफल हुआ क्योंकि इसे संवैधानिक संशोधन के साथ जोड़ा गया। अगर इसे परिसीमन से अलग एक स्वतंत्र विधेयक के रूप में लाया जाता, तो यह पारित हो जाता।"उन्होंने आरोप लगाया कि महिला आरक्षण और परिसीमन को एक साथ जोड़ने के कारण विधेयक विफल हुआ और केंद्र ने इस मुद्दे पर राजनीति की।
कर्नाटक के मंत्री एच के पाटिल ने आरोप लगाया कि केंद्र ने महिला आरक्षण प्रस्ताव के जरिए परिसीमन को आगे बढ़ाने की कोशिश की। उन्होंने कहा, "महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक संसद द्वारा खारिज कर दिए गए। प्रधानमंत्री ने अत्यधिक राजनीति की और किसी तरह परिसीमन विधेयक को पारित कराने की कोशिश की।"मंगलुरु में राज्य के स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव ने इस कदम को "धोखा" बताते हुए कहा कि महिला आरक्षण के नाम पर परिसीमन को आगे बढ़ाया जा रहा है, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हुई है।
दिल्ली में मंत्री प्रियंक खरगे ने भी केंद्र की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि विधायी स्पष्टता का अभाव था। "जनगणना अभी पूरी नहीं हुई है और वे परिसीमन करना चाहते हैं," उन्होंने कहा।
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