कोलकाता , मई 28 -- पश्चिम बंगाल में मुर्शिदाबाद जिले के एक व्यक्ति को करीब डेढ़ साल तक महिलाओं के लिए निर्धारित 'लक्ष्मी भंडार' योजना के तहत लाभ प्राप्त करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है जिसका नाम मतदाता सूची में भी दर्ज नहीं है।
पुलिस ने गुरुवार को यह जानकारी दी।
बहरामपुर के शियालमारो गांव के रहने वाले आरोपी रकीबुल शेख को उस समय हिरासत में ले लिया गया, जब मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने नबन्ना में नवनिर्मित 'अन्नपूर्णा योजना' के आवेदन फॉर्म का अनावरण करते हुये इस मामले का उल्लेख किया था।
सूत्रों के अनुसार यह गड़बड़ी राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं से जुड़े लाभार्थियों के डाटा सत्यापन के दौरान सामने आयी। अधिकारियों ने पाया कि पुरुष होने के बावजूद, शेख कथित तौर पर इस योजना के तहत मासिक वित्तीय सहायता प्राप्त कर रहा था।
प्रारंभिक जांच से पता चला है कि पिछले कई महीनों से उसके बैंक खाते में नियमित रूप से राशि स्थानांतरित की जा रही थी। अधिकारी अब इस बात की जांच कर रहे हैं कि आवेदन को मंजूरी कैसे मिली और इतने लंबे समय तक बिना पकड़े भुगतान कैसे जारी रहा। अधिकारियों ने कहा कि स्थानीय प्रशासनिक कार्यालयों और बैंकिंग चैनलों द्वारा की जाने वाली सत्यापन प्रक्रियाओं सहित कई स्तरों पर जांच चल रही है।
इलाके में कथित तौर पर एक छोटी सी खाद्य सामग्री की दुकान चलाने वाले शेख ने पुलिस पूछताछ के दौरान स्वीकार किया कि उसके खाते में पैसे जमा हुये थे। उस व्यक्ति ने हालांकि दावा किया कि उसने कभी भी औपचारिक रूप से इस योजना के लिए आवेदन नहीं किया था।
उन्होंने कहा, "मुझे नहीं पता कि मेरे खाते में पैसे कैसे आने लगे। उस समय मुझे पैसों की सख्त जरूरत थी, इसलिए मैंने किसी को नहीं बताया। कई लोगों ने मुझे सलाह दी कि जब पैसे आ ही रहे हैं तो रख लो।"उस व्यक्ति ने दावा किया कि उसने इस मामले को लेकर ब्लॉक विकास कार्यालय (बीडीओ ऑफिस) से संपर्क किया था, लेकिन कथित तौर पर उसे कोई जवाब नहीं मिला। उसने कहा, "मैंने उनसे भुगतान रोकने के लिए कहा था, लेकिन पैसे जमा होना जारी रहा। अब मुझे एहसास हुआ कि यह गलत था।" पैसे स्वीकार करने की बात मानते हुये भी शेख ने जिम्मेदारी प्रशासन पर डालने की कोशिश की। उसने कहा, "यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वह जांच करे कि महिलाओं की योजना के तहत एक पुरुष के खाते में पैसे कैसे स्थानांतरित किये जा रहे थे। मुझे नहीं पता कि ऐसा भ्रष्टाचार कैसे हुआ।"इस घटना ने सत्ताधारी दल और विपक्षी दलों के बीच एक नया राजनीतिक गतिरोध पैदा कर दिया है। स्थानीय तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने दावा किया कि ग्राम पंचायतों के पास इस योजना के तहत लाभार्थियों को मंजूरी देने का अधिकार नहीं है। उनके अनुसार, यह चूक या तो ब्लॉक प्रशासन के स्तर पर हुई होगी या फिर बैंक सत्यापन प्रक्रियाओं के दौरान हुई होगी।
भाजपा ने इस प्रकरण को पश्चिम बंगाल में कल्याणकारी योजनाओं के कार्यान्वयन में भ्रष्टाचार और पारदर्शिता की कमी का एक स्पष्ट उदाहरण बताया। प्रशासनिक सूत्रों ने आगे बताया कि शेख और उनकी पत्नी सुल्ताना परवीन वर्तमान में स्थानीय मतदाता सूची में भी शामिल नहीं हैं। खबरों के अनुसार, उनकी नागरिकता की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाये गये हैं।
सूत्रों ने कहा कि इस दंपती ने मतदाता सूची में अपना नाम वापस शामिल कराने के लिए एक न्यायाधिकरण का रुख किया है। पुलिस और जिला अधिकारियों ने यह पता लगाने के लिए विस्तृत जांच शुरू कर दी है कि क्या यह मामला किसी तकनीकी खामी का परिणाम था या इसमें आधिकारिक मिलीभगत के साथ कोई बड़ी संगठित धोखाधड़ी शामिल थी।
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