दरभंगा , मार्च 07 -- लब्ध प्रतिष्ठित साहित्यकार एवं चंद्रधारी मिथिला कला महाविद्यालय के प्रधानाचार्य प्रोफेसर मुस्ताक अहमद ने शनिवार को कहा कि समाज की छवि तभी बदल सकती है, जब महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास किए जाएं और उन्हें विकास के सभी अवसर प्रदान किए जाएं।
चंद्रधारी मिथिला कला महाविद्यालय के अंग्रेजी विभाग और महिला प्रकोष्ठ द्वारा अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित एक समारोह की अध्यक्षता करते हुए प्रो. मुस्ताक अहमद ने कहा कि विश्व के इतिहास में यह एक स्पष्ट तथ्य है कि जिस देश में महिलाओं को शिक्षा और विकास के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास किए गए, वह देश विश्व के विकसित देशों में प्राथमिकता प्राप्त करने में सफल रहा।
प्रो. अहमद ने कहा कि प्रत्येक वर्ष 08 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है और इसका एक समृद्ध इतिहास है कि पहली बार 1908 में अमेरिका के न्यूयॉर्क में कपड़ा श्रमिकों ने महिलाओं के काम के घंटे कम करने की मांग उठाई थी। इसके बाद, 1910 में डेनमार्क और फिर 1911 में जर्मनी ने भी यही मांग उठाई। अंततः, 1975 में संयुक्त राष्ट्र ने 08 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया।
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