चंडीगढ़/मोहाली , अगस्त 06 -- महिलाओं की सुरक्षा और संकट की स्थिति में उन्हें त्वरित सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पंजाब पुलिस की ओर से शुरू किये गये 'सांझ राहत केंद्र' राज्य में सामुदायिक पुलिसिंग का प्रभावी मॉडल बनकर उभरे हैं।

पंजाब के पुलिस महानिदेशक गौरव यादव ने बताया कि इन केंद्रों के माध्यम से महिलाओं को काउंसलिंग, कानूनी सहायता, पुलिस सहयोग, संकट हस्तक्षेप और पुनर्वास जैसी समेकित सेवाएं उपलब्ध करायी जा रही हैं। मोहाली में केवल दो प्रशिक्षित काउंसलरों के साथ शुरू की गयी यह पहल अब एसएएस नगर (मोहाली), लुधियाना, फतेहगढ़ साहिब और जालंधर तक विस्तार पा चुकी है। पिछले दो वर्षों में इन केंद्रों में 1,069 मामले दर्ज किये गये हैं, जबकि 1,656 मामलों की स्क्रीनिंग की गयी है।

श्री यादव ने कहा कि सांझ राहत केंद्र महिलाओं को घरेलू हिंसा, मानसिक उत्पीड़न और अन्य संकटपूर्ण परिस्थितियों से बाहर निकालकर सामान्य जीवन जीने में मदद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि समय रहते हस्तक्षेप कर महिलाओं के खिलाफ हिंसा को रोकना पंजाब पुलिस की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि मोहाली के एक मामले में पति द्वारा मारपीट और जान से मारने की धमकी मिलने पर पीड़िता ने सांझ राहत केंद्र से संपर्क किया। केंद्र की टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए महिला को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया, मायके तक सुरक्षित पहुंचाने की व्यवस्था की और आरोपी पति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करवायी।

एक अन्य मामले का उल्लेख करते हुए डीजीपी ने बताया कि परिवार और पति द्वारा छोड़ी गयी एक गर्भवती महिला गंभीर हालत में अस्पताल पहुंची थी। सांझ राहत केंद्र की टीम ने उसका परामर्श किया, उसे पीजीआई में भर्ती करवाया और लगभग दो महीने तक उपचार के दौरान लगातार भावनात्मक सहयोग दिया। गर्भपात जैसी कठिन परिस्थिति के बाद भी टीम ने महिला को मानसिक रूप से संभाला, रोजगार दिलाने में मदद की और परिवार से दोबारा जोड़ने के प्रयास किए।

महिलाओं की सुरक्षा के लिए पंजाब पुलिस द्वारा चलाये जा रहे अन्य कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए डीजीपी ने बताया कि 'जागृति कार्यक्रम' के तहत पिछले लगभग दो वर्षों में 12,482 स्कूलों में जागरूकता अभियान चलाये गये, जिनसे 11.75 लाख से अधिक बच्चों तथा 76,299 शिक्षकों, प्राचार्यों और कर्मचारियों को संवेदनशील बनाया गया। इसके अलावा महिला हेल्प डेस्क पहल के तहत पिछले पांच वर्षों में 69,329 जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किये गये, जिनमें साइबर अपराध, घरेलू हिंसा, बाल यौन शोषण, बाल विवाह निषेध कानून, किशोर न्याय अधिनियम, नशा विरोध और लैंगिक समानता जैसे विषयों पर लोगों को जागरूक किया गया।

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