महासमुंद , जून 18 -- छत्तीसगढ़ में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत और शाला प्रवेश उत्सव के बीच महासमुंद जिले के अनेक शासकीय विद्यालयों की बदहाल स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है। जिले में कई स्कूल भवन जर्जर अवस्था में हैं, जहां विद्यार्थियों को मूलभूत सुविधाओं के अभाव में अध्ययन करना पड़ रहा है।
शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में कक्षा पहली से बारहवीं तक के विद्यार्थियों के लिए कुल 1,956 शासकीय विद्यालय संचालित हैं। इनमें 1,276 प्राथमिक, 492 पूर्व माध्यमिक, 65 हाई स्कूल और 126 हायर सेकेंडरी विद्यालय शामिल हैं। शैक्षणिक सत्र 2025-26 में इन विद्यालयों में एक लाख 41 हजार 503 विद्यार्थी अध्ययनरत थे।
प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले के 54 विद्यालय भवन पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं और उपयोग के लिए सुरक्षित नहीं माने जा रहे। इन भवनों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के सामने सुरक्षा का संकट बना हुआ है। कई स्कूलों में छत से पानी टपकने, बिजली व्यवस्था खराब होने, शौचालय और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव तथा कक्षाओं की कमी जैसी समस्याएं बनी हुई हैं।
जिला प्रशासन ने दो दिसंबर 2025 को 113 विद्यालयों की मरम्मत के लिए 96.39 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की थी। निर्धारित समय-सीमा के अनुसार मरम्मत कार्य तीन माह में पूरा किया जाना था, लेकिन नौ माह बीत जाने के बाद भी केवल 16 विद्यालयों में ही कार्य पूर्ण हो सका है। शेष 97 विद्यालयों में या तो काम अधूरा है अथवा कई स्थानों पर कार्य शुरू ही नहीं हो पाया है।
बागबाहरा विकासखंड के शासकीय प्राथमिक शाला भदरसी का भवन वर्षों से जर्जर स्थिति में है, जिसके कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई अतिरिक्त कक्ष में संचालित की जा रही है। इसी प्रकार शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला मुनगाशेर में भी भवन संबंधी समस्याओं के कारण विद्यार्थियों और शिक्षकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
मोंगरापाली रेवा स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय में शौचालय, बिजली और पेयजल जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। विद्यालय की छत क्षतिग्रस्त होने के कारण विद्यार्थियों को जमीन पर बैठकर अध्ययन करना पड़ रहा है। गांव के हाई स्कूल की स्थिति भी इससे अलग नहीं है, जहां भवन की जर्जरता विद्यार्थियों की सुरक्षा और शिक्षा दोनों के लिए चुनौती बनी हुई है।
स्थानीय विद्यार्थियों, अभिभावकों और जनप्रतिनिधियों ने विद्यालयों की स्थिति में शीघ्र सुधार की मांग करते हुए कहा है कि शिक्षा के अधिकार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सुरक्षित एवं सुविधायुक्त विद्यालय भवन आवश्यक हैं।
मरम्मत कार्यों में हो रही देरी को लेकर शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नए शैक्षणिक सत्र में विद्यार्थियों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन और शिक्षा विभाग किस प्रकार प्रभावी कदम उठाते हैं।
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