मुंबई , सितंबर 26 -- महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के 358 तालुकाओं में से 265 को आधिकारिक तौर पर सूखा घोषित करते हुए कहा है कि प्रदेश के खजाने पर पहला हक अन्नदाता-किसानों का है।
उपमुख्यमंत्री शिंदे ने जमीनी स्तर पर हालात का जायज़ा लेने के बाद संवाददाताओं से ज़ोर देकर कहा कि महायुति सरकार राज्य के किसान समुदाय के साथ मज़बूती से खड़ी है। उन्होंने कहा कि सूखे खेतों और परेशान किसानों को खुद देखने के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और कैबिनेट सहयोगियों के साथ मिलकर सूखा घोषित करने की प्रशासनिक प्रक्रिया को युद्ध स्तर पर तेज़ी से पूरा किया। तत्काल राहत देने के लिए सरकार के नये प्रशासनिक आदेश में 12 अहम रियायतें लागू की गयी हैं, जिनमें शामिल हैं-कृषि ऋण की वसूली पर पूरी तरह रोक, मौजूदा फसल ऋणों का पुनर्गठन, कृषि पंपों के बिजली बिलों में भारी रियायत और माफ़ी, ज़मीन के लगान की वसूली से पूरी छूट और प्रभावित परिवारों के छात्रों के लिए परीक्षा शुल्क पूरी तरह माफ़।
श्री शिंदे ने कहा, "राजनीति भविष्य के चुनावों के लिए रुकी रह सकती है लेकिन हमारे किसान एक अभूतपूर्व संकट का सामना कर रहे हैं।" उन्होंने विपक्ष से आग्रह किया कि वे दलगत राजनीति छोड़कर प्रशासन का सहयोग करें ताकि राहत आखिरी व्यक्ति तक पहुंच सके।
उन्होंने पहले किये गये उपायों का ज़िक्र करते हुए बताया कि राज्य समर्थित ऋण राहत कार्यक्रमों के तहत 56 लाख से अधिक किसान लाभार्थियों को पहले ही सीधी आर्थिक मदद मिल चुकी है। श्री शिंदे ने विपक्षी दलों (कांग्रेस, राकांपा-एसपी और शिवसेना-यूबीटी) पर भी तीखा हमला बोला, जो सरकार द्वारा ठोस कदम उठाये जाने के बावजूद विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं।
इस बीच प्रदेश भाजपा के मुख्य प्रवक्ता नवनाथ बान ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि सूखा घोषित होने से सूखा प्रभावित इलाकों, खासकर धाराशिव, लातूर और सोलापुर जिलों के किसानों को राहत मिलेगी, जहां हालात गंभीर हैं।
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