पुणे , अगस्त 13 -- महाराष्ट्र सरकार ने किसानों के भूमि अधिकारों को मजबूत करने, भूमि अधिग्रहण के समय होने वाले विवादों को कम करने और संपत्ति पंजीकरण प्रणाली में पारदर्शिता एवं दक्षता बढ़ाने के लिए कई अहम सुधारों की घोषणा की है। राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने इन फैसलों की जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि एक विशेष पहल के तहत सरकार ऐसे 2.31 लाख किसानों के भू-अभिलेखों को अपडेट करने की योजना बना रही है, जो वास्तव में जमीन पर काबिज हैं और खेती कर रहे हैं, लेकिन संपत्ति कार्ड में मालिक के रूप में उनका नाम दर्ज नहीं है। भूमि अभिलेख आयोग इस संबंध में समीक्षा बैठक करेगा, जिसके बाद मानक संचालन प्रक्रिया तय की जाएगी।

सरकार, वनाधिकार रखने वाले आदिवासी किसानों के लिए एक नयी 'सात-याने-बारा' (7/12) या संपत्ति कार्ड प्रणाली भी शुरू करेगी। वर्तमान में ऐसे लगभग 60,000 किसानों का रिकॉर्ड केवल ग्राम अधिकारियों या वन अधिकार समितियों के पास है और प्रॉपर्टी कार्ड में उनके नाम दर्ज नहीं हैं। एक ही संपत्ति कार्ड पर कई नाम होने पर मुआवजे संबंधी विवादों को रोकने के लिए सरकार ने भूमि अधिग्रहण से पहले ही व्यक्तिगत हिस्सों/उप-विभाजनों का निर्धारण अनिवार्य करने का फैसला लिया है। अधिग्रहण की प्रक्रिया सभी सह-धारकों के हिस्से तय होने के बाद ही आगे बढ़ेगी, जिससे प्रत्येक हिस्सेदार को उसके वास्तविक कब्जे के अनुसार मुआवजा मिल सके।

इसके अलावा पंजीकरण विभाग के आधुनिकीकरण के तहत पूरे महाराष्ट्र में 60 मॉडल स्टाम्प कार्यालय बनाए जायेंगे। इस पहल का उद्घाटन 20 अगस्त को पुणे में होगा। ये कार्यालय आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे और नागरिकों को आधुनिक सरकारी सेवा केंद्रों के समान सेवाएं प्रदान करेंगे।

इसके अलावा, 'रेडी रेकनर' (सर्किल रेट) दरों की विसंगतियों को दूर करने के लिए सरकार 'माइक्रो-ज़ोनिंग' लागू करेगी। प्रत्येक प्रॉपर्टी कार्ड और व्यक्तिगत भूखंड का अलग-अलग मूल्यांकन किया जाएगा, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि किसी बड़ी संपत्ति का मूल्यांकन उसी इलाके की छोटी संपत्तियों की दरों पर असर न डाले। मुंबई में माइक्रो-ज़ोनिंग का काम पूरा हो चुका है और अब पुणे और अन्य शहरी केंद्रों में इसे लागू करने की योजना है।

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