मुंबई , जून 24 -- महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने बुधवार को सदन में सत्र के पहले दिन शोक प्रस्ताव पढ़ते समय उच्चारण में हुई गलतियों के लिए बुधवार को माफी मांगी।
श्री नार्वेकर ने महान गायिका आशा भोसले को श्रद्धांजलि देते समय भाषा संबंधी गलतियों को लेकर विपक्ष की आलोचना का सामना करते हुए अपनी स्थिति स्पष्ट की और कहा कि इस घटना के पीछे कोई गलत इरादा नहीं था।
उन्होंने कहा, " मुझे दिये गये शोक प्रस्ताव की छपी हुयी कॉपी बहुत अस्पष्ट थी और उसमें फ़ॉन्ट का आकार बहुत छोटा था। मैंने अनजाने में वैसा ही पढ़ा, जैसा वह दिख रहा था, जिससे गलतियां हुईं। यह पूरी तरह से तकनीकी चूक थी। "श्री नार्वेकर ने मराठी भाषा और सदन की गरिमा के प्रति अपनी गहरी प्रतिबद्धता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, " मैं पिछले साढ़े चार वर्षों से सभी सदस्यों के सहयोग से इस सदन के अध्यक्ष के रूप में सेवा कर रहा हूं। इस कार्यकाल के दौरान मैंने मराठी में कई सम्बोधन दिये हैं और कई शोक प्रस्ताव पेश किये हैं। इस सदन ने हमेशा अपना कामकाज मराठी में किया है और मैं अपनी मातृभाषा का बहुत सम्मान करता हूं। "उन्होंने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कहा कि दिवंगत आशा भोसले जैसी हस्ती का अनादर करने के बारे में सोचना भी उनके लिए असंभव है।
श्री नार्वेकर ने चल रहे विवाद को खत्म करने की कोशिश करते हुए कहा, " मैं सदस्यों से आग्रह करता हूं कि वे इस घटना को कोई राजनीतिक रंग न दें। अगर अनजाने में हुई इन गलतियों से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं, तो मैं दिल से खेद व्यक्त करता हूं। "विधानसभा अध्यक्ष का यह बयान शोक सभा के दौरान उच्चारण की गलतियों से शुरू हुई तीखी बहस के बीच आया है। राजनीतिक हलकों में इन गलतियों की कड़ी आलोचना हुई थी।
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