मुंबई , जून 21 -- महाराष्ट्र विधानमंडल के सोमवार से शुरू हो रहे मानसून सत्र हंगामेदार रहने के आसार हैं।
अत्यधिक राजनीतिक अनिश्चितता के बीच रक्षात्मक रुख से उबरने के लिए संघर्ष कर रहे विपक्ष का सामना बेहद मजबूत और हमलावर सत्ताधारी महायुति गठबंधन से होने जा रहा है।
काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा यह सत्र ऐसे समय में शुरू हो रहा है, जब किसी भी सदन में आधिकारिक तौर पर कोई 'विपक्ष का नेता' मनोनीत नहीं किया गया है। लोकसभा चुनावों के बाद श्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) में संभावित दलबदल की हालिया अपुष्ट रिपोर्टों ने विपक्षी खेमे में तनाव का माहौल बना दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्ष मजबूत विधायी रणनीति बनाने के बजाय अस्तित्व बचाने की लड़ाई लड़ता दिख रहा है। विधानसभा में 20 सदस्यों के साथ शिवसेना (यूबीटी) सबसे बड़ा विपक्षी दल है। उस पर टूट का खतरा मंडरा रहा है। इसी तरह की चिंता राकांपा के शरद पवार गुट में भी बनी हुई है।
सूत्रों के मुताबिक कई विपक्षी विधायक फूंक-फूंककर कदम रख रहे हैं। उन्हें डर है कि सरकार के प्रति अधिक आक्रामक होने पर उनके चुनाव क्षेत्रों के विकास कोष रोके जा सकते हैं। इससे उनके व्यक्तिगत प्रशासनिक कार्यों में भी बाधाएं आ सकती हैं।
भाजपा, शिवसेना और राकांपा से मिलकर बना सत्ताधारी महायुति गठबंधन अपनी मौजूदा राजनीतिक लय को लेकर बेहद उत्साहित है। दिलचस्प बात यह है कि पिछले कुछ समय से विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने में विपक्ष से अधिक सत्ता पक्ष के विधायक मुखर रहे हैं। इस सत्र में भी यही रुख जारी रहने की उम्मीद है।
आंतरिक बिखराव और आपसी तालमेल की कमी के बाद भी विपक्ष कई ज्वलंत मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है। इनमें कई जिलों में सूखे जैसे गंभीर हालात, पानी का घटता स्टॉक और किसानों की कर्ज माफी का अनसुलझा मुद्दा शामिल है।
इसके अलावा ईंधन की बढ़ती कीमतों से आम बजट पर पड़ता बोझ, प्रस्तावित 'शक्तिपीठ हाईवे' के खिलाफ बढ़ता जन-आक्रोश और राज्य की कानून-व्यवस्था पर उठते सवाल अहम हैं। विपक्षी नेताओं के राजनीतिक दलबदल कराने के लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों (ईडी और सीबीआई) के कथित दुरुपयोग के गंभीर आरोप भी इस सूची में शामिल हैं।
सोमवार को विधानमंडल की बैठक शुरू होने पर सभी की नजरें इस बात पर टिकी होंगी कि क्या विपक्ष अपनी आंतरिक गुटबाजी और दलबदल के डर से उबरकर एकजुटता प्रदर्शित कर पायेगा या फिर महायुति गठबंधन अपनी भारी संख्या और राजनीतिक आत्मविश्वास के बल पर एजेंडा तय करता रहेगा।
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