मुंबई , जून 16 -- महाराष्ट्र विधानमंडल के आगामी 22 जून से शुरू होने वाले मानसून सत्र में सत्ताधारी महायुति गठबंधन और विपक्षी महा विकास अघाड़ी के बीच ज़बरदस्त राजनीतिक टकराव देखने को मिल सकता है।यह सत्र 10 जुलाई तक चलेगा।
राजनीतिक जानकार इस सत्र को दोनों पक्षों के लिए एक लिटमस टेस्ट (अग्नि-परीक्षा) के रूप में देख रहे हैं क्योंकि स्थानीय निकायों के अहम चुनावों से पहले नैरेटिव तय करने के लिए विधानसभा का इस्तेमाल किए जाने का अनुमान है। विपक्षी खेमे में कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) शामिल हैं, उन्होंने सरकार को कई मोर्चों पर घेरने के लिए एक व्यापक रणनीति तैयार की है। कार्यवाही के दौरान जिन मुद्दों के छाए रहने की उम्मीद है उनमें कृषि संकट, मराठा और ओबीसी आरक्षण को लेकर गतिरोध, कानून-व्यवस्था की मौजूदा स्थिति और बढ़ती बेरोजगारी शामिल हैं।
राज्य में मॉनसून कमजोर पड़ गया है और विदर्भ, मराठवाड़ा तथा पश्चिमी महाराष्ट्र के कई इलाकों में पानी की भारी किल्लत है। किसान बुआई में आ रही दिक्कतों से जूझ रहे हैं, वहीं सरकार द्वारा बांध के पानी को मुख्य रूप से पीने के लिए आरक्षित करने के फैसले का कड़ा विरोध हो रहा है। विपक्ष के एक प्रवक्ता ने कहा, "सरकार किसानों की बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने में विफल रही है और कर्ज माफ़ी की प्रक्रिया पात्रता की जटिलताओं में फंसी हुई है।"सरकार हालांकि, इस चुनौती का सामना करने की तैयार कर रही है। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सत्ताधारी सरकार अपने विकास का रोडमैप, अवसंरचना परियोजनाओं और कल्याणकारी योजनाओं पर ध्यान केंद्रित करने की योजना बना रही है। उम्मीद है कि सरकार महिला किसानों को औपचारिक मान्यता देने के मकसद से एक विधेयक भी पेश करेगी जो लोगों तक अपनी पहुंच बढ़ाने की सरकार की एक बड़ी कोशिश होगी।
महायुति के अंदरूनी हालात भी चर्चा का विषय बने हुए हैं। खासकर नासिक, सांगली और सतारा जैसे ज़िलों में होने वाले विधान परिषद चुनावों के लिए उम्मीदवारों के चयन को लेकर मतभेदों ने विपक्ष को सत्ताधारी गठबंधन की आपसी एकजुटता पर सवाल उठाने का एक और मौका दे दिया है।
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